राहुल चावला, धर्मशाला। कांगड़ा जिले में श्रद्धा और भक्ति का माहौल एक बार फिर चरम पर है। मां जयंती देवी मंदिर में पंच भीष्म मेले धूमधाम से शुरू हो गए हैं। पांच दिनों तक चलने वाले इन मेलों में दूर-दराज़ से हजारों श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए कांगड़ा पहुंच रहे हैं।
ऐतिहासिक जयंती माता मंदिर, जो कांगड़ा किला के ठीक सामने लगभग 500 फीट ऊंची पहाड़ी पर स्थित है, में हर साल पंच भीष्म मेले—जिन्हें स्थानीय लोग ‘पंच भीखू’ भी कहते हैं—भव्य रूप से आयोजित किए जाते हैं। इस बार मेले एक नवंबर से शुरू होकर पांच नवंबर तक चलेंगे।
मंदिर परिसर को रंग-बिरंगी रोशनी और फूलों से सजाया गया है। श्रद्धालु माता के जयकारों के साथ मंदिर में हाजिरी लगा रहे हैं, जिससे पूरा परिसर भक्तिमय माहौल में गूंज उठा है। परंपरा के अनुसार, मेले के दौरान पांच अखंड दीप माता के दरबार में पांच दिनों तक जलाए जाते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक माह में मनाया जाने वाला भीष्म पंचक व्रत अत्यंत शुभ माना गया है। पुराणों में भी इस व्रत का उल्लेख मिलता है। जयंती माता, जो मां दुर्गा की छोटी भुजा का स्वरूप मानी जाती हैं, द्वापर युग से यहां पूजित होती आ रही हैं।
मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और लोक परंपरा का प्रतीक भी है। श्रद्धालु मां के दर्शन के साथ-साथ यहां लगने वाले धार्मिक कार्यक्रमों, भजन-संध्याओं और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आनंद भी ले रहे हैं।
श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर प्रशासन ने पुख्ता इंतजाम किए हैं। एएसपी बीर बहादुर ने बताया कि मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष पार्किंग स्थल भी बनाए गए हैं।
उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की है कि मंदिर की यात्रा के दौरान सावधानी बरतें, खासकर पैदल मार्ग पर चलते समय, क्योंकि मंदिर तक पहुंचने के रास्ते में गहरी खाई भी है। प्रशासन ने सुनिश्चित किया है कि किसी को भी किसी तरह की असुविधा या खतरे का सामना न करना पड़े। पंच भीष्म मेलों के दौरान मां जयंती के जयकारों से गूंजते इस पवित्र स्थल का दृश्य हर किसी को भक्ति और आस्था से भर देता है।
