अध्यक्ष नीति महाजन ने गिनाईं ऑनलाइन प्रक्रिया की खूबियां
भाजपा पार्षदों ने एसडीएम को सौंपा ज्ञापन, चार साल से लंबित शौचालय निर्माण कार्यों पर भी उठाए सवाल
Summer express/संजीव महाजन -: नूरपुर नगर परिषद में विकास कार्यों को लेकर अब टेंडर प्रक्रिया पर राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है। 11 विकास कार्यों के लिए जारी टेंडरों को लेकर भाजपा पार्षदों ने नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। पार्षदों का आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया में उन्हें विश्वास में नहीं लिया गया और जरूरी जानकारी भी उपलब्ध नहीं करवाई गई। मामले को लेकर वार्ड नंबर आठ के पार्षद चिराग गुप्ता सहित रजनी महाजन और रंजना शर्मा ने एसडीएम नूरपुर अरुण शर्मा को ज्ञापन सौंपकर टेंडर रद्द करने और पूरी प्रक्रिया दोबारा पारदर्शी तरीके से करवाने की मांग की है। वहीं, नगर परिषद अध्यक्ष नीति महाजन ने इन आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि सभी टेंडर ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत जारी किए गए हैं। उन्होंने भाजपा पार्षदों के पुराने कार्यकाल पर भी सवाल उठाए हैं।
11 टेंडरों को लेकर पार्षदों ने उठाई आपत्ति
भाजपा पार्षद चिराग गुप्ता ने बताया कि नगर परिषद की ओर से 14 अक्टूबर 2026 को 11 विकास कार्यों के टेंडर जारी किए गए, लेकिन संबंधित वार्ड पार्षदों को इसकी विधिवत जानकारी नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि टेंडर से संबंधित पत्र में सभी पार्षदों को इसकी प्रति भेजने का उल्लेख किया गया है, जबकि कई पार्षदों को यह पत्र प्राप्त ही नहीं हुआ।उन्होंने प्रशासन से मांग की कि पत्र भेजने के दावे की पुष्टि के लिए डिस्पैच रिकॉर्ड और प्राप्ति से संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं। चिराग गुप्ता का कहना है कि वार्डों में होने वाले विकास कार्यों की जानकारी संबंधित पार्षदों को देना जरूरी है, क्योंकि जनता के प्रति उनकी भी जवाबदेही होती है।उन्होंने कहा कि निर्वाचित प्रतिनिधियों को विश्वास में लिए बिना विकास कार्यों की प्रक्रिया आगे बढ़ाना उचित नहीं है। पार्षदों को केवल औपचारिक प्रतिनिधि बनाकर नहीं रखा जाना चाहिए।
चार साल से लंबित शौचालय निर्माण का मामला भी गरमाया
भाजपा पार्षदों ने स्वच्छ भारत मिशन के तहत वर्ष 2022 में स्वीकृत शौचालय निर्माण और मरम्मत कार्यों को लेकर भी नगर परिषद से जवाब मांगा है। पार्षदों के अनुसार, इन कार्यों के लिए 18 अगस्त 2022 को धनराशि उपलब्ध हो गई थी, लेकिन इसके बावजूद आज तक काम पूरा नहीं हो पाया है।उन्होंने बताया कि पूर्व नगर परिषद के कार्यकाल में दो बार टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन दोनों बार इसे रद्द कर दिया गया। पार्षदों ने सवाल उठाया कि जब सरकार की ओर से चार साल पहले ही बजट उपलब्ध करवा दिया गया था, तो अब तक इन कार्यों को पूरा क्यों नहीं किया गया?उन्होंने मांग की कि दोनों बार टेंडर रद्द होने के कारणों की जांच की जाए और लंबित कार्यों को लेकर जिम्मेदारी तय की जाए।
विकास कार्यों का विरोध नहीं, पारदर्शिता की मांग : भाजपा पार्षद
भाजपा पार्षदों ने स्पष्ट किया कि वे विकास कार्यों के विरोध में नहीं हैं, बल्कि उनकी मांग है कि सभी कार्य नियमानुसार और पारदर्शी तरीके से करवाए जाएं। उन्होंने 11 विकास कार्यों के टेंडर रद्द कर नए सिरे से प्रक्रिया शुरू करने तथा सभी पार्षदों को विश्वास में लेने की मांग की।
भाजपा के पुराने कार्यकाल पर उठाए सवाल
दूसरी ओर, नगर परिषद अध्यक्ष नीति महाजन ने भाजपा पार्षदों के आरोपों पर जवाब देते हुए कहा कि नगर परिषद की ओर से जारी सभी टेंडर ऑनलाइन किए गए हैं। उन्होंने बताया कि टेंडर प्रक्रिया शुरू होने से पहले संबंधित विकास कार्यों की जानकारी दो समाचार पत्रों में भी प्रकाशित करवाई गई थी।नीति महाजन ने कहा कि भाजपा पार्षदों को पारदर्शिता की बात करने से पहले अपने पुराने कार्यकाल में अपनाई गई प्रक्रिया का भी जवाब देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के कार्यकाल में पहले अंदरखाते काम आवंटित किए जाते थे और बाद में टेंडर प्रक्रिया अपनाई जाती थी।उन्होंने सवाल किया कि उस समय भाजपा नेताओं ने पारदर्शिता को लेकर आवाज क्यों नहीं उठाई?
पुराने लंबित कार्यों के लिए पूर्व कार्यकाल भी जवाबदेह : नीति महाजन
स्वच्छ भारत मिशन के तहत वर्ष 2022 में मिली धनराशि और लंबित शौचालय निर्माण कार्यों को लेकर नीति महाजन ने कहा कि उस समय नगर परिषद में भाजपा की कमेटी थी। यदि इन कार्यों के लिए बजट वर्ष 2022 में उपलब्ध हो गया था, तो भाजपा के कार्यकाल में इन्हें पूरा क्यों नहीं करवाया गया?उन्होंने कहा कि वर्तमान नगर परिषद कमेटी को कार्यभार संभाले अभी करीब तीन महीने ही हुए हैं। ऐसे में पुराने कार्यों को लेकर पूर्व कार्यकाल के प्रतिनिधियों को भी अपनी जिम्मेदारी स्पष्ट करनी चाहिए।नीति महाजन ने कहा कि वह भाजपा के कार्यकाल में करवाए गए विकास कार्यों और उनमें अपनाई गई टेंडर प्रक्रिया का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक करने के लिए तैयार हैं।
प्रशासन के फैसले पर टिकी निगाहें
नूरपुर नगर परिषद में 11 विकास कार्यों के टेंडर को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक बहस का रूप लेता जा रहा है। भाजपा पार्षद जहां टेंडर प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे रद्द करने और लंबित कार्यों की जांच की मांग कर रहे हैं, वहीं अध्यक्ष नीति महाजन ने टेंडर ऑनलाइन होने का दावा करते हुए पूर्व भाजपा कार्यकाल की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं।फिलहाल दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। अब एसडीएम नूरपुर को सौंपे गए ज्ञापन पर प्रशासन क्या कार्रवाई करता है और टेंडर प्रक्रिया को लेकर क्या निर्णय लिया जाता है, इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
