शिमला,10 मार्च:हिमाचल प्रदेश की परिवहन व्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली एचआरटीसी में जल्द ही तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था लागू हो सकती है। निगम प्रबंधन और कर्मचारी यूनियनों के बीच हाल ही में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में इस बात पर चर्चा हुई कि चालकों और परिचालकों की ड्यूटी का आकलन अब पारंपरिक तरीकों के बजाय डिजिटल डेटा के आधार पर किया जाए। बैठक की अध्यक्षता मुख्य महाप्रबंधक पंकज सिंघाल ने की, जिसमें भविष्य की संचालन व्यवस्था को लेकर कई प्रस्ताव सामने आए।
बैठक में प्रबंधन ने तीन प्रमुख सुधारों की रूपरेखा पेश की, जिन्हें लेकर कर्मचारी संगठनों के बीच बहस शुरू हो गई है। पहला प्रस्ताव यह है कि ड्यूटी के समय का सटीक मूल्यांकन करने के लिए बसों की मौजूदा गति सीमा में वृद्धि की जाए, ताकि रूट पर लगने वाले समय का बेहतर आकलन किया जा सके। दूसरा प्रस्ताव कर्मचारियों के लिए 48 घंटे की साप्ताहिक ड्यूटी व्यवस्था लागू करने से जुड़ा है। इसके अलावा, वर्ष 2024 में लागू की गई सामान नीति पर भी कर्मचारियों से फीडबैक मांगा गया, ताकि यात्रियों और स्टाफ के बीच होने वाले विवादों को कम किया जा सके।हालांकि कर्मचारी यूनियनों ने इन प्रस्तावों पर कई सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि हिमाचल के कई ग्रामीण और दुर्गम रूटों पर सड़कें बेहद संकरी और खराब स्थिति में हैं। ऐसे इलाकों में 20 किलोमीटर की दूरी तय करने में दो घंटे तक लग जाते हैं और औसत गति करीब 10 किलोमीटर प्रति घंटा ही रह जाती है। यूनियन प्रतिनिधियों का तर्क है कि तीखे मोड़ों और खराब सड़कों वाले पहाड़ी इलाकों में गति सीमा बढ़ाना यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से जोखिम भरा हो सकता है।
कर्मचारी संगठनों ने सुझाव दिया कि बसों में पहले से मौजूद जीपीएस और परिचालकों के पास उपलब्ध ई-टिकटिंग मशीनों के डेटा का इस्तेमाल कर ड्यूटी समय की सटीक गणना की जा सकती है। उनके मुताबिक हर टिकट कटने का समय, बस के रुकने का स्थान और यात्रा का पूरा रिकॉर्ड डिजिटल रूप में उपलब्ध है, इसलिए अनुमानित गति के बजाय वास्तविक डेटा को आधार बनाया जाना चाहिए।बैठक में 48 घंटे की साप्ताहिक ड्यूटी व्यवस्था पर भी विरोध दर्ज किया गया। यूनियनों का कहना है कि मोटर ट्रांसपोर्ट वर्कर्स एक्ट 1961 के अनुसार आठ घंटे से अधिक काम को ओवरटाइम माना जाता है। इसके अलावा 2024 में लागू नई लगेज नीति को लेकर भी कर्मचारियों ने बदलाव की मांग की है। उनका कहना है कि बिना यात्री भेजे जाने वाले सामान पर किराया बढ़ाया जाए और पहले की अपेक्षाकृत उदार व्यवस्था को फिर से लागू किया जाए, ताकि यात्रियों और कर्मचारियों के बीच होने वाले विवाद कम हो सकें।
Chandrika
