लाहौल-स्पीति/सचिन शर्मा: जनजातीय जिला लाहौल स्पीति से कांग्रेस के पूर्व विधायक रहे रवि ठाकुर का नाम कांग्रेस के जाने माने नेताओं में शामिल है। रवि ठाकुर ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत युवा कांग्रेस से की। हालांकि उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि भी राजनीति से जुड़ी हुई थी। ऐसे में उन पर राजनीति का प्रभाव पहले से ही था और यही वजह रही कि उनका झुकाव राजनीति की तरफ से बना। युवा कांग्रेस से अपने सफर की शुरुआत है कर ठाकुर ने कांग्रेस पार्टी के कई अहम पदों पर काम किया। वहीं एक बार जीत भी उन्होंने जनजातीय जिला लाहौल स्पीति से कांग्रेस के टिकट पर ही हासिल की।
रवि ठाकुर का जन्म 2 दिसंबर 1962 को मनाली के रांगड़ी में माता लता ठाकुर और पिता निहाल चंद ठाकुर के घर में हुआ। रवि ठाकुर के पिता निहाल चंद भी राजनीति में काफी सक्रिय थे। वहीं उनकी माता लता ठाकुर एमएल भी राजनीति में काफी सक्रिय रही। उनकी माता लता ठाकुर इंदिरा गांधी की भी काफी करीबी थी। लता ठाकुर 1972 में लाहौल स्पिति से कांग्रेस की विधायिका रही है। यही वजह है कि रवि ठाकुर की पहले से ही राजनीति में रुचि रही और उन्होंने भी राजनीति को ही अपने लिए चुना।
ठाकुर ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा सोलन व शिमला से की। इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए वह चंडीगढ़ गए ओर वंहा से ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन की। इसके बाद 1984 से उन्होंने अपने राजीनीतिक करियर की शुरुआत की ओर यूथ कोंग्रेस के कार्यकारिणी सदस्य रहे। इसके बाद लगातार कांग्रेस के अहम पदों पर उन्होंने कार्य किया। 1986 में रवि ठाकुर जिला कांग्रेस कमेटी लाहौल स्पीति महामंत्री रहे । 1987 में वह संगठन मंत्री प्रदेश कांग्रेस सेवा दल रहे, जबकि 1988 में वह प्रदेश कांग्रेस सेवा दल के अध्यक्ष रहे। इसके बाद 1998 में उन्होंने लाहौल स्पीति से अपना पहला चुनाव आजाद प्रत्याशी के रूप में लड़ा लेकिन इस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा और वह 235 वोट से यह चुनाव हार गए।
इसके बाद भी कांग्रेस पार्टी में विभिन्न पदों पर रहते हुए रवि ठाकुर ने लंबे समय तक कार्य किया। इसके बाद वर्ष 2012 में कांग्रेस ने उन्हें विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी का प्रतिनिधित्व करने का मौका दिया। उन्होंने 2012 में कांग्रेस पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा और करीब 4 हज़ार के करीब वोटों से विजयी रहे। इसके साथ ही वह 2013 में उपाध्यक्ष अनुसूचित जनजातिय आयोग भारत सरकार में भी रहे ओर 2016 में उन्हें अध्यक्ष पद का चार्ज भी दिया गया। 2017 में हुए विधानसभा चुनावों में एक बार फिर से कांग्रेस पार्टी ने उनपर विश्वास जताया और लाहौल स्पीति में कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर रवि ठाकुर ने अपना तीसरा चुनाव लड़ा और इन चुनावों में उन्हें हार झेलनी पड़ी। इस चुनाव में उनके सामने डॉ. राम लाल मार्कंडेय थे।
इस बार विधानसभा चुनावों में लाहौल स्पीति से हो सकते हैं कांग्रेस के प्रत्याशी
प्रदेश में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों में लाहौल स्पीति से कांग्रेस एक बार फिर से रवि ठाकुर को अपना उम्मीदवार बना सकती है। रवि ठाकुर ने जिला लाहौल स्पीति से टिकट के लिए अपनी दावेदारी जताई है ओर वह अपने विधानसभा क्षेत्र में सक्रिय हो चुके है। पहले भी कांग्रेस को इस सीट से वह विजय दिलवा चुके हैं ऐसे में इस बार भी फिर से उन पर यह बड़ी जिम्मेवारी है कि वह कांग्रेस को इस सीट से जीत हासिल करवाएं।
गांधी परिवार के क़रीबी माना जाता है रवि कुमार का परिवार
कांग्रेस के पूर्व विधायक रवि ठाकुर के माता-पिता दोनों का संबंध राजनीति से था। उनकी माता लता ठाकुर लाहौल स्पीति से कांग्रेस के एमएलए रही थी और वह गांधी परिवार के बेहद करीबी थी। इंदिरा गांधी जब भी लाहौल स्पीति अतिथि तो उनके पास जरूर जाती थी। यही वजह है कि रवि ठाकुर को भी गांधी परिवार का करीबी माना जाता है।
