भावना, शिमला: नगर निगम शिमला के सफाई कर्मचारियों ने सरकार की ओर से अपनी मांगों की अनदेखी पर रोष प्रकट किया है। 2007 से कर्मचारी पदों पर नियुक्ति की मांग कर रहे है,लेकिन सरकार ने इन कर्मचारियों की बात पर कोई अमल नहीं किया है। नगर निगम में वर्तमान ने 237 पद खाली है जिन्हें भरने की मांग लगातार पिछले 12 सालों से की जा रही है लेकिन प्रदेश सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है।
कर्मचारियों का कहना है कि कम लोगों की तैनाती होने से काम का भार बहुत ज्यादा बढ़ गया है। सफाई कर्मचारी निरंतर बिना किसी छुट्टी के काम कर रहे है। ऐसे में यदि कोई कर्मचारी बीमार पड़ जाता है तो भी वह काम पर आने के लिए मजबूर है। यदि कोई कर्मचारी छुट्टी कर भी लेता है तो दूसरे पर काम दोगुना पड़ जाता है।
सफाई यूनियन के पूर्व जनरल सेक्रेटरी रमेश कुमार ने बताया कि इस वक्त शिमला में 176 सफाई कर्मचारी काम कर रहे हैं जिन पर शिमला के 41 वार्डों की सफाई की ज़िम्मेवारी है। उन्होंने कहा कि सरकार के सामने कई सालों से यह मांग रखी जा रही है। कांग्रेस और बीजेपी दोनों पार्टियां सत्ता में रही लेकिन हमारी मांगों पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। इतने सालों से सफाई कर्मचारियों के लिए बैठने और सामान रखने तक की सुविधा भी नहीं है। सफाई कर्मचारियों का सामान भी चोरी हो रहा है,जिससे काम करना मुश्किल हो रहा है। अब कर्मचारी सामान को अपने घर तो नहीं ले जा सकता।
सफाई कर्मचारी संजीव ने बताया कि 6 वार्डों में सफाई का काम शुरु किया था अब वार्डों की संख्या 41 हो गई है लेकिन कर्मचारी कम हो गए है। जो कर्मी सेवानिवृत हो गए है या जो इस दुनिया में नहीं रहे हैं उनके पद खाली है। सरकार उन्हें क्यों नहीं भर रही है। उन्होंने कहा कि खाली सीटों को जल्द भरा जाना चाहिए जिससे कर्मचारियों पर से काम का बोझ कम हो सकें।
