संजीव महाजन, नूरपुर: मन में अगर कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो बड़ी से बड़ी मुश्किलें भी इंसान को अपने लक्ष्य तक पहुंचने से नहीं रोक सकती। ऐसा ही हौसला और मेहनत अपने लक्ष्य तक पहुंचने के लिए दिखाई है योग साधक रणजीत सिंह ने। 10 वर्ष की आयु से 17 वर्ष तक कि आयु तक कांगड़ा के फुटपाथ पर अपने पिता राज कुमार के साथ सब्ज़ी बेचकर कर अपने परिवार का भरन-पोषण करने के साथ ही अपनी शिक्षा को जारी रखने वाले रणजीत सिंह ने आज योग साधक के रूप में अपनी एक अलग पहचान बनाई है।
मात्र 7 वर्ष के अभ्यास में योग के माध्यम से 60 विश्व किर्तिमान रणजीत सिंह ने भारत मां की गोद में अर्पित किए हैं। रणजीत सिंह ने छोटी सी उम्र से ही संघर्ष भरा जीवन जीना शुरु कर दिया था,लेकिन इस संघर्ष के बीच उन्होंने अपनी पढ़ाई को जारी रखा। आई टी आई से डिपलोमा व बी. टेक इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद रणजीत सिंह प्रदेश विद्युत विभाग मे कनिष्ठ अभियंता के रूप में अपना बेहतर करियर अच्छा बना चुके थे, लेकिन एक गरीब परिवार के बच्चे की मेहनत यहीं नहीं रूकी, रणजीत ने 2015-2016 मे योग का अभ्यास शुरू किया।

उन्होंने हिमालय की कंदराओं में प्रतिकूल परिस्थितियों में रहकर अपने तन-मन को साधा, जिसके प्ररेक योगी रणजीत सिंह अपने कुलिग हृदलाय व स्वामी रामदेव को मानते है। इसके बाद रणजीत सिंह ने वर्ष 2016 में योग सिखाने की अपनी यात्रा को शुरू किया। गानवी गांव में योग करवाते हुए योगी रणजीत सिंह ने 11 विश्व कीर्तिमान बनाए हैं। उनका यह सिलसिला अब तक लाखों लोगों को योग करवाने के साथ 60 विश्व कीर्तिमान तक पहुंच चुका है।
योगी रणजीत सिंह दूरदर्शन पर भी योग करवा चुके हैं। वहीं हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सहित तीन- तीन राज्यपाल योगी रणजीत सिंह को सम्मानित कर चुकें हैं। योग में कईं अतंरराष्ट्रीय अवार्ड प्राप्त कर चुके योगी रणजीत सिंह वर्तमान में सरकारी नौकरी के साथ- साथ कांगड़ा में त्रिगर्त दिव्य योग आश्रम के माध्यम से अतंरराष्ट्रीय स्तर पर योग से लोगों को स्वास्थ्य लाभ देने के साथ बच्चों को भारतीय संंस्कृति के साथ जोड़ रहे है।
