शिमला/कमल भारद्वाज: शिमला में चेरी की फसल पर फाइटोप्लाजमा बीमारी का प्रकोप देखने को मिल रहा है। 10 दिनों के भीतर लगभग 150 बागवानों के चेरी के पेड़ फाइटोप्लाजमा की चपेट में आ चुके हैं। शिमला के बागी, कोटगढ़, नारकंडा, थानाधार, कंडियाली, और कुमारसैन में चेरी की फसल काफी ज्यादा होती है। और इस बीमारी ने दस्तक दे दी है।
फाइटोप्लाज़्मा के लक्षण
बीमारी से पूरा पौधा अपने आप ही सूख रहा है। पत्ते सूखकर अपने आप झड़ रहे हैं। हालांकि अभी तक इस बीमारी के नाम के बारे में सही जानकारी बागवानी विभाग के पास भी नहीं है। बता दें कि चेरी की फसल प्रदेश की आर्थिकी में लगभग 200 करोड़ का योगदान देती है। जिस पर बीमारी की दस्तक से संकट के बादल छा गए हैं। इसे लेकर बागवानी भी अलर्ट पर है। बागीचों में फाइटोप्लाजमा बीमारी की जांच के लिए बागवानी विभाग ने विशेषज्ञों की टीम फील्ड में भेज दी है। जिन पौधो में बिमारी लगी है, उनके सैंपल इकट्ठा किए जा रहे हैं।
बीमारी को रोकने के लिए स्प्रे शेड्यूल पर किया जा रहा काम
निदेशक बागवानी सुदेश मोकटा ने कहा कि बीमारी को रोकने के लिए स्प्रे शेड्यूल पर भी काम किया जा रहा है। चेरी के पेड़ों के पत्ते झड़ रहे हैं पत्तों के पूरी तरह झड़ने के बाद मार्च-अप्रैल में ही फाइटोप्लाजमा पर सही जानकारी मिल पाएगी। प्रदेश में अचानक इस बिमारी के आने से बागवानी विभाग ने बैठक बुलाकर स्थिति से निपटने की रणनीति बनाई है। प्रदेश में चेरी के बगीचों में इस तरह की बीमारी पहली बार देखी गई है। शिमला जिला के 400 हेक्टेयर जमीन पर चेरी की फ़सल होती है। जिसका उत्पादन 800 से 850 मेट्रिक टन फसल का है।
