चंद्रिका – हिमाचल प्रदेश के जिला सोलन में स्थित श्री जोहड़ जी साहिब हिंदू व सिखों की आस्था का केंद्र है ।श्रद्धालुओं व पर्यटकों का मन मोहने वाला यह स्थल सोलन जिले के महलोग क्षेत्र में स्थित है, जहां पर हर तीसरे वर्ष दो सप्ताह तक चलने वाला मेला लगता है। यह प्रदेश का सबसे बड़ा मेला है। इस स्थान पर गुरु नानक देव जी, बाला और मरदाना के साथ यहां कौड़ा राक्षस का उद्धार करने आए थे।
अपने शिष्यों के साथ यहां आए थे गुरु नानक देव जी
मान्यता है कि 15वीं शताब्दी में इस स्थल पर एक बहुत बड़ा खूंखार कौड़ा नामक राक्षस रहता था, जिसने पूरे क्षेत्र में आतंक मचा रखा था। वह मनुष्यों को गर्म तेल के कड़ाहे में भूनकर खा जाता था। एक बार गुरु नानक देव जी के दो प्रिय शिष्य बाला और मरदाना इस क्षेत्र में विचरण कर रहे थे, तो एक शिष्य को राक्षस ने बंदी बना लिया। राक्षस मनुष्यों को भूनने से पहले कड़ाहे की परिक्रमा करवाता था। मरदाना ने परिक्रमा करते समय गुरु नानक देव जी का ध्यान किया, तो वे वहां प्रकट हो गए। इस पर राक्षस और भी खुश हुआ कि उसे दो-दो शिकार प्राप्त हुए हैं। राक्षस ने गुरु नानक देव जी को भी परिक्रमा करने को कहा। इस पर गुरु जी ने कहा कि उन्हें परिक्रमा नहीं आती और वह स्वयं ऐसा करके बताए। राक्षस ने परिक्रमा करनी शुरू की, तो गुरु नानक देव जी ने जैसे ही उसे हाथ लगाया राक्षस गर्म तेल के कड़ाहे में गिर गया। अपना अंतिम समय निकट देखकर गुरु जी से प्रार्थना करने लगा कि उसकी मृत्यु के पश्चात उसे भी याद रखा जाए। इस प्रकार उस खूंखार राक्षस का अंत हो गया।
बाबा जी ने स्थापित किया था यहां अपना निशान साहिब
इस महिमा को सुनकर बाबा कर्म चंद जो इससे पूर्व पपलोगी में रहते थे, वहां पहुंचे और यहां आकर बस गए और जिस स्थान पर राक्षस का उद्धार किया गया था, वहां पर बाबा जी ने अपना निशान साहिब स्थापित किया। जहां पर राक्षस का कड़ाहा था, वहां पर बाबा जी ने अपने बैठने का स्थान बनाया और जहां गुरु नानक देव जी ने राक्षस को मारने के बाद विश्राम किया था, वहां पर साधु-महात्माओं के ठहरने के लिए जगह बनाई। तभी से हर तीसरे वर्ष गुरु नानक देव जी की फतेह के उपलक्ष्य में बहुत बड़ा मेला लगता है।
इस छोटी सी गुफा से निकल गए थे गुरु गोबिंद सिंह घोड़े समेत
जोहड़ जी स्थान पर बाबा गंगदास, बाबा खड़क सिंह और बाबा जवाहर सिंह ने भी तप किया है। यहां स्थित जोहड़ की विशेषता है कि यह ऊंची चोटी पर होने के बावजूद कभी नहीं सूखता। इसी स्थान पर एक छोटी सी गुफा है, जिसे स्वर्गद्वारी भी कहा जाता है। इस गुफा में से सिक्खों के दसवें गुरु गोबिंद सिंह घोड़े समेत निकल गए थे।
