विकास शर्मा, चिंतपूर्णी: हिमाचल प्रदेश के जिला ऊना में स्थित विश्व विख्यात शक्तिपीठ मां चिंतपूर्णी में श्रद्धालुओं की बड़ी आस्था हैं। श्रद्धालु मां चिंतपूर्णी मंदिर में माता रानी के दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं। इनमें से कुछ श्रद्धालु ऐसे भी हैं जो कठिन यात्रा पूरी कर माता रानी के दरबार में दर्शन करने के लिए आते हैं। कुछ श्रद्धालु पैदल, कुछ दंडवत होकर और कुछ बसों और अपनी कार के माध्यम से मां चिंतपूर्णी के दरबार में पहुंचते हैं। मां के दरबार में पहुंचने वाले हर श्रद्धालु की मां से अपनी-अपनी मनोकामना और उम्मीद होती हैं परंतु कुछ श्रद्धालु समाज के कल्याण के लिए और अपने धर्म के प्रचार के लिए ऐसी यात्रा करते हैं जिसके बारे में सुनकर हर कोई हैरान हो जाता हैं। ऐसी ही एक का यात्रा श्रद्धालु श्री योगी हंरबस नाथ ने भी की हैं।
पंजाब गुरदासपुर के नया गुग्गरां गांव के श्री योगी हंस नाथ निराहर कि जो हर वर्ष नया गुग्गरां से हरिद्वार ,हरिद्वार से कालका देवी, कालका देवी से नैना देवी, नैना देवी से चिंतपूर्णी, चिंतपूर्णी से ज्वाला जी देवी ,ज्वालाजी देवी से कांगड़ा, कांगड़ा से चामुंडा, चामुंडा से वैष्णो देवी की यात्रा करते हैं। इस दौरान यह योगी अपने साथ एक रेहडी में माता की ज्योति लेकर चलते हैं जिसके बारे में यह बताते हैं कि इस माता की ज्योति के सहारे ही वह अपनी इस लंबी यात्रा को पूर्ण कर पाते हैं। अपनी इस यात्रा को पूरा करते हुए श्री योगी हंस नाथ मां चिंतपूर्णी के दरबार पहुंच चुके हैं।
यहां पहुंचने पर उन्होंने बताया कि नया गुग्गरा गांव से चिंतपूर्णी पहुंचने में उन्हें 1 महीने का समय लग गया। इस दौरान उन्होंने हरिद्वार, कालका देवी और नैना देवी के दर्शन कर लिए जबकि ज्वाला जी, कांगड़ा देवी,बगलामुखी, चामुंडा देवी और वैष्णो देवी के दर्शन करने अभी बाकी हैं। पूरी यात्रा को 3 महीने का समय लगता हैं। यात्रा पूरी करने के बाद अपने गांव में पहुंचने पर वह भंडारे का आयोजन करते हैं। यात्रा के दौरान किसी से भी हाथ में दान स्वीकार नहीं करते हैं। इसके अलावा उन्होंने बताया कि वह 8 वर्ष की आयु से योगी बन गए हैं और पिछले काफी लंबे समय से वह अन्न भी ग्रहण नहीं कर रहे हैं।
