भावना शर्मा: हिमाचल की राजधानी शिमला जिसे पहाड़ों की रानी के नाम से भी विश्व भर में जाना जाता हैं। यह शहर ऐतिहासिक इमारतों का शहर हैं। इसी शहर में स्थित हैं साउथ ईस्ट एशिया का पहला ओपन एयर आइस स्केटिंग रिंक। जी हां शिमला के लक्कड़ बाजार में स्थित आइस स्केटिंग रिंक जहां सर्दियों के इन दिनों में शिमला के स्थानीय लोग ख़ासकर बच्चे ओर बाहर से आने वाले पर्यटक स्केटिंग का लुत्फ़ उठाते हैं यह आइस स्केटिंग रिंक अंग्रेजों की ही देन हैं। इस रिंक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह रिंक भारत स्केटिंग क्लब में स्थापित होने वाला पहला तो वहीं पूरे दक्षिण पूर्व एशिया में अपनी तरह का एक मात्र पहला ऐसा आइस स्केटिंग रिंक हैं। ऐसा क्यों है इसके पीछे की कहानी भी बेहद दिलचस्प हैं।
आपको बता दें कि शिमला के रिज मैदान के बिल्कुल नीचे लक्कड़बाजार बसस्टैंड के साथ ही यह आइस स्केटिंग रिंक हैं जहां बर्फ़ बिल्कुल प्राकृतिक तरीके से जमाई जाती हैं, जैसा कि ब्रिटिश कालीन समय में किया जाता था। वर्ष 1920 में बने इस आइस स्केटिंग रिंक का स्वरुप आज भी बिल्कुल वैसा ही है जैसा ब्रिटिश कालीन समय में था। इस स्केटिंग रिंक में दिसंबर माह की शुरुवात में ही प्राकृतिक तरीके से बर्फ जमाई जाती है जब यहां बरस की एक मोटी परत तैयार हो जाती है तो उसके बाद यहां बर्फ पर स्केटिंग के रोमांच का खेल शुरू हो जाता हैं। आइस स्केटिंग रिंक आज भी क्लब के रूप में चल रहा है और बहुत से लोगों ने इसे क्लब की सदस्यता ली है जो सर्दियों के इन दिनों में यहां स्केटिंग का लुत्फ उठाने के लिए पहुंचते हैं।
वर्ष 1920 में अंग्रेज मिस्टर ब्लेसिंगटन ने की थी स्केटिंग क्लब की शुरुवात
शिमला में बने इस आइस स्केटिंग क्लब की शुरुआत वर्ष 1920 में अंग्रेज मिस्टर ब्लेसिंगटन ने की थी। उस समय इस आइस स्केटिंग क्लब में मेंबरशिप सिर्फ यूरोपियन लोगों को ही दी जाती थी लेकिन उसके बाद कुछ आरक्षणों के साथ यहां कुछ भारतीयों को भी इसकी सदस्यता दी गई। वहीं आजादी के बाद इस क्लब को सभी के लिए खोल दिया गया ओर सदस्यता भी सभी को दी जाने लगी।
यह हैं आइस स्केटिंग रिंक के बनने के पीछे की दिलचस्प कहानी
शिमला को जब अंग्रेजों ने अपनी शीतकालीन राजधानी बनाया था तो उस समय लक्कड़ बाजार स्थित है इस आइस स्केटिंग रिंक मैं टेनिस कोर्ट हुआ करता था। इस टेनिस कोर्ट में अंग्रेज टेनिस खेलने का लुत्फ़ उठाते थे,लेकिन एक दिन सर्दियों के इन दिनों में जब यहां पानी का नल खुला रह गया तो मिस्टर ब्लेसिंगटन जिन्होंने इस आइस स्केटिंग रिंक को बनाया था उन्होंने पाया कि पानी के नल में बर्फ जमी हुई हैं। साथ ही जो पानी आसपास के क्षेत्र में भरा था वह भी पूरी तरह से बर्फ की परत में तब्दील हो चुका हैं। इसके बाद उनके मन में ख्याल आया कि क्यों ना इस टेनिस कोर्ट को पानी से भर दिया जाए तो यहां स्केटिंग की जा सकती हैं। इसके बाद ही किया गया और टेनिस कोर्ट में पानी भरा गया जिसकी एक मोटी परत बर्फ के रूप में जमकर तैयार हो गई और इस परत पर अंग्रेजों ने स्केटिंग करना शुरू कर दिया।
पानी का छिड़काव कर तैयार की जाती हैं 15 सेंटीमीटर बर्फ़ की मोटी परत
शिमला के इस ब्रिटिश कालीन समय के आइस स्केटिंग रिंक में आज भी प्राकृतिक तरीके से बर्फ जमाई जाती हैं। दिसंबर माह की शुरुआत में ही रिंक में पानी का छिड़काव करना शुरू कर दिया जाता हैं। धीरे-धीरे इस पानी के जमने से यहां बर्फ़ की 15 सेंटीमीटर तक की मोटी परत तैयार की जाती हैं। बर्फ की स्पर्श के तैयार हो जाने के बाद इस पर स्केटिंग शुरू की जाती हैं। अलग-अलग सेक्शन यहां सुबह शाम स्केटिंग के करवाए जाते हैं, हालांकि यह प्रक्रिया पूरी तरह से मौसम पर निर्भर रहती हैं। क्लब के सदस्यों की बात की जाए तो इसमें बच्चों से बूढों तक सभी शामिल हैं।
महान हस्तियां भी उठा चुकी हैं यहां स्केटिंग करने का लुत्फ़
आइस स्केटिंग क्लब शिमला में कई नामी हस्तियां स्केटिंग का आनंद उठा चुकी हैं। इनमें चेकोस्लोवाकिया के मार्शल टीटो, पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी, संजय गांधी, अभिनेता राज कुमार रिंक में स्केटिंग कर चुके हैं। अब तक आठ राष्ट्रीय स्तर की स्केटिंग स्पर्धाओं की शिमला आइस स्केटिंग क्लब मेजबानी कर चुका है। इसमें आइस हॉकी, फिगर, स्पीड स्केटिंग नियमित तौर पर होती है, वहीं नए स्केटर्स को प्रशिक्षण की सुविधा भी मिलती हैं।
बॉलीवुड फिल्मों के अभिनेता भी कर चुके हैं स्केटिंग,क़ई फिल्मों की हो चुकी हैं शूटिंग
राजधानी शिमला का यह स्केटिंग रिंक बॉलीवुड फिल्मों में भी कई बार नजर आ चुका हैं। रिंक में शशि कपूर की फिल्म जंगली, मनोज कुमार की फिल्म वो कौन थी, हम तुम और वो में विनोद खन्ना, राज कपूर की फिल्म मेरा नाम जोकर में ऋृषि कपूर ने इस स्केटिंग रिंक में स्केटिंग करते हुए शूटिंग की हैं।
