शिमला (एकता): हिमाचल प्रदेश के बड़े राजनीतिक चेहरों में से सुरेश भारद्वाज एक हैं। उन्होंने अपने राजनीति सफर में काफी मेहनत की और कई उतार-चढ़ाव देखे। बता दें कि हिमाचल प्रदेश की शिमला सीट पर साल 2017 के विधानसभा चुनाव में शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज ने जीत हासिल की थी। वह भाजपा के टिकट पर शिमला निर्वाचन क्षेत्र से विधान सभा के सदस्य हैं। साथ ही जयराम ठाकुर के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार में कानून और शिक्षा मंत्री के पद पर कार्यरत हैं।
2003 से 2006 तक हिमाचल भाजपा के रहे अध्यक्ष
जन्म शिमला में शारधानन्द के यहां 15 मार्च, 1952 को हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा शिमला से हुई। वे कॉलेज के दौरान से ही छात्र आंदोलन में सक्रिय हैं। उन्होंने 1971 में विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की है. इसके साथ उन्होंने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से विधि में स्नातक की डिग्री भी ली है। संगठन में विभिन्न दायित्व निभाने के बाद वह 2003 से 2006 तक हिमाचल भाजपा के अध्यक्ष रहे। इससे पहले वह राज्यसभा के लिए भी चुने गए थे। उनका विवाह सुधा भारद्वाज से हुआ है उनके दो बेटा-बेटी हैं।
जानिए कैसा रहा सुरेश भारद्वाज का राजनीतिक सफर
सुरेश भारद्वाज अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में राष्ट्रीय सचिव के पद पर कार्यरत रह चुके हैं। वह 1977 में हिमाचल प्रदेश लोकतांत्रिक मोर्चा के संयोजक बने। 1978-81 में हिमाचल प्रदेश भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा राष्ट्रीय कोषाघ्यक्ष बने। वह 1987-88 में भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के सचिव बने। भारद्वाज 2003-2006 तक हिमाचल प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष रहे। बता दें कि वह प्रदेश विधानसभा के लिए 1990 में पहली बार निर्वाचित हुए। इतना ही नहीं वह हिमाचल सरकार के साथ सदन की विभिन्न अन्य समितियों के सदस्य भी रह चुके हैं। साल 2002 में वह राज्य सभा के लिए चुने गए थे। दिसम्बर 2007 में फिर विधानसभा के लिए चुने गए। साल 2012 में हिमाचल प्रदेश विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए। इसके बाद साल 2017 में दोबारा हिमाचल प्रदेश विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए।
