संजु चौधरी, शिमला: देशभर में हिमाचल प्रदेश शिक्षा के क्षेत्र में दूसरे स्थान पर आता है लेकिन यहां स्कूलों में शिक्षा से जुड़े दावों की पोल लगातार खुलती जा रही हैं। यहां सरकार की ओर से स्कूल तो धड़ल्ले से खोले जा रहे हैं,लेकिन उन स्कूलों में कहीं शिक्षक नहीं है तो कहीं पढ़ने के लिए छात्र तक नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि जब छात्र ही नहीं है तो सरकार स्कूल क्यों खोल रही हैं। वहीं जिन स्कूलों में छात्र है तो वहां शिक्षकों की नियुक्ति क्यों नहीं हो पा रही हैं।
हालात यह हैं कि प्रदेश में 3 हजार स्कूल केवल एक शिक्षक के सहारे चल रहे हैं, जबकि 286 स्कूल ऐसे है जहां कोई भी छात्र नहीं हैं, जबकि शिक्षक तैनात कर दिए गए हैं। प्रदेश में 12 हजार शिक्षकों के पद खाली चल रहे हैं। प्रदेश में शिक्षकों की कमी को लेकर वर्तमान सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार ने पूर्व की भाजपा सरकार को जिम्मेवार ठहराया हैं।
वहीं शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने पूर्व जयराम सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रदेश में पूर्व 5 सालों के दौरान शिक्षा का स्तर काफी गिरा दिया गया हैं। पूर्व सरकार ने राजनीतिक लाभ लेने के लिए जगह-जगह स्कूल तो खोल दिए लेकिन उनमें ना तो छात्र हैं और ना ही शिक्षकों की तैनाती की गई हैं। सरकारी स्कूलों में 12 हजार के करीब शिक्षकों के पद खाली हैं, जबकि पूर्व सरकार ने 6 माह पहले 320 के करीब शिक्षण संस्थान खोले गए थे और 286 स्कूल ऐसे है जिनमें छात्र तो थे नहीं लेकिन शिक्षक कई स्कूलों में तैनात कर दिए गए हैं। इसमें 228 प्राथमिक पाठशाला हैं जबकि 56 हाई स्कूल शामिल हैं जहां कोई छात्र नहीं हैं। इन स्कूलों को अब बंद कर दिया गया हैं। सरकार ने इन स्कूलों की समीक्षा की है और स्कूलों में छात्रों की संख्या को देखते हुए यह फैसला लिया गया हैं।
उन्होंने कहा कि जिन प्राइमरी स्कूलों में छात्रों की संख्या 10 से ऊपर हैं उन्हें बंद नहीं किया जाएगा जबकि मिडिल स्कूल जहां छात्रों की संख्या 15 से ज्यादा हैं और हाईस्कूल जहां छात्रों की संख्या 20 है उन स्कूलों को सरकार बंद नहीं करेगी। इसी तरह सीनियर सेकेंडरी स्कूल की संख्या 32 रखी गई हैं, जबकि 65 छात्रों वाले कालेजों को भी सरकार बंद नहीं करेगी।
अब सरकार नहीं बल्कि अभिभावकों खुद खरीदेंगे बच्चों की वर्दी
सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार ने स्कूलों में छात्रों को दी जाने वाली वर्दी में भी बदलाव किया हैं। अब स्कूलों में छात्रों को शिक्षा विभाग की ओर से वर्दी नहीं दी जाएगी बल्कि सीधे ही अभिभावकों के खाते में सरकार पैसे डालेगी और अभिभावक ही बच्चों के लिए वर्दी खरीदेंगे। इससे पहले अब तक शिक्षा विभाग की ओर से छात्रों को वर्दी मुहैया करवाई जा रही थी। शिक्षा मंत्री ने कहा कि पारदर्शिता लाने को लेकर एक तरह की व्यवस्था की गई हैं।
