राकेश,ऊना(TSN): आधुनिकता के दौर में लोगों ने मिट्टी के दीयों को अंधेरे में धकेल दिया था, लेकिन लोग एक बार फिर से मिट्टी के इन दीयों की अहमियत पहचान सके इसके लिए स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं ने पहल शुरू कर दी हैं। ऊना जिला में स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं दिन-रात एक करके अपनी पुरानी परंपराको बनाए रखने के लिए गोबर के दीये और मोमबत्तियां बनाने में जुटी हैं। स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं का कहना है कि त्यौहारों में मिट्टी के दीपक जलाने से घर में सुख, समृद्धि और शांति आती है ओर पर्यावरण को भी नुकसान नहीं पहुंचता।
महिलाओं का कहना है कि जैसे-जैसे लोगों को मिट्टी के दीयों की महत्ता के बारे में पता चल रहा है, लोग इनकी ओर आकर्षित हो रहे हैं और इनकी बाजार मांग भी लगातार बढ़ती जा रही हैं। स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं दीपावली त्यौहार के लिए मोमबत्ती और दीये बनाने में लगी हुई हैं। महिलाएं विभिन्न रंगों की सुंदर आकार की मोमबत्तियां ओर गाय के गोबर और मिट्टी के मिश्रण से सजावटी दीये बना रही हैं। उन्होंने बताया कि स्थानीय लोगों की ओर से इनकी मांग की जा रही हैं। लोगों की मांग को ध्यान में रखकर समूह की महिलाएं मोमबत्तियां व दीये निर्मित कर रही हैं।
महाकाल ग्राम संगठन की प्रधान अनीता राणा ने बताया कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से ग्रुप जुड़ा हुआ हैं। एनआरएलएम के माध्यम से ग्रुप को 2,500 रूपये का स्टार्टअप फंड ओर 15,000 रूपये रिवॉल्विंग फंड के रूप में मिलते हैं। इसके अतिरिक्त ग्रुप की महिलाएं अपनी सेविंग से 100-100 रूपये प्रतिमाह एकत्रित करके जमा करती हैं। उन्होंने बताया कि महिलाओं को अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए पैसे मांगने की जरूरत नहीं पड़ी बल्कि जमा राशि में से ही एक प्रतिशत ब्याज पर ऋण लेकर अपना व्यवसाय शुरू किया जिससे उन्हें काफी लाभ हुआ और महिलाओं को भी घर बैठे रोजगार का अवसर मिला हैं।
अनीता राणा ने बताया कि एसएचजी समूह की सभी महिलाएं दीये और मोमबत्तियां बनाने में प्रशिक्षित हैं और कड़ी मेहनत करके सुंदर और आकर्षक दीये बनाने में काफी मेहनत कर रही हैं ताकि लोग दीये और मोमबत्तियों के सुंदर और आकर्षक डिजाइनों से आकर्षित होकर इन्हें खरीदें। उन्होंने बताया कि निर्मित दीये और मोमबत्तियों की बिक्री के लिए प्रशासन की ओर से उन्हें उचित स्थल उपलब्ध करवाया जाता हैं। उन्होंने बताया कि अभी दीवाली के लिए कुछ दिन शेष हैं कि लेकिन संबंधित क्षेत्रों के लोग घरों में आकर ही दीये व मोमबत्तियां ले जा रहे हैं और अधिक मांग कर रहे हैं। घर से ही अभी तक 5 हज़ार रूपये की बिक्री कर चुकी हैं जिससे समूहों को काफी लाभ मिल रहा हैं।
