संजीव महाजन,नूरपूर: देवों की धरती हिमाचल प्रदेश में बहुत से मंदिर और बहुत से देवी देवता बसे हुए हैं। इन देवी-देवताओं से लोगों की श्रद्धा और आस्था जुड़ी हुई हैं। इसी तरह हिमाचल में बहुत से ऐसे शिवालय भी हैं जिनकी ऐतिहासिक कहानियां बेहद ही रोचक हैं। ऐसा ही एक मंदिर सुलयाली स्थित डिब्केशबर महादेव का भी हैं। यहां भगवान भोलेनाथ स्वयं पिंडियों में बने शिवलिंग के रूप में विराजमान हैं जो इस मंदिर को अन्य मंदिरों से अलग बनाता हैं। यही वजह है कि यह शिव मंदिर अन्य शिव मंदिरों से एक अलग पहचान बनाए हुए हैं।
यह शिव मंदिर नूरपुर ब्लॉक के सुलयाली गांव में हैं। इस प्राचीन प्रसिद्ध डिब्केशबर महादेव शिव मंदिर में शिवरात्रि का पर्व बड़ी धूमधाम से मनाया जा रहा हैं। शिवरात्रि के इस अवसर पर डिब्केशबर महादेव मंदिर में दूर दूर से भोलेनाथ की पूजा अर्चन, दर्शन करने , आशिर्वाद पाने हजारों, लाखों की तादाद में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।
मान्यता के अनुसार यह डिब्केशबर महादेव शिव मंदिर हजारों साल पुराना हैं यहां शिव भोलेनाथ एक गुफा में विराजमान हैं। बुजुर्गों की ओर से दी जानकारी के मुताबिक आदिकाल सतयुग में यहां इस गुफा में दूध और पानी की धाराएं बहती थी जिससे यहां इसी पिंडिया बन गई जो शिवलिंग का रूप धारण कर चुकी हैं और यहां से एक ऐसी गुफा है जो सतयुग में हरिद्वार निकलती थी। यहां पर कई ऐसे महात्माओं, संतों की समाधियां भी है जिन्होंने इस शिव मंदिर की पूजा में अपनी जिंदगी बिता दी। तब से ही यहां स्थानीय लोग इस शिव मंदिर में भोलेनाथ की पूजा करते आ रहे हैं।
गांववासियों ने मिलकर यहां शिवरात्रि के दिन यज्ञ व भंडारा करवाना शुरू कर दिया है। इस शिव मंदिर में जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से सेवा करता हैं। भोलेनाथ उसकी हर मनोकामना पूरी करते हैं। यह आस्था और विश्वास सदियों से माना जा रहा हैं। शिवरात्रि के अवसर पर यहां पंजाब, हिमाचल, हरियाणा, दिल्ली से शिव भोलेनाथ के भक्त पूजा अर्चना व आशिर्वाद पाने पहुंचते हैं। सुबह तीन बजे से भक्तों का यहां पूजा अर्चना करने के लिए आने का सिलसिला शुरू हो गया था।
