संजीव महाजन,नूरपूर: हिमाचल प्रदेश के उपमंडल ज्वाली के अधीन पंचायत जौंटा में स्थित एक ऊंची पहाड़ी पर मां छत्रील माता का मंदिर श्रद्धालुओं में काफी प्रसिद्ध हैं। यहां पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु माता रानी के दर्शनों के लिए पहुंचते हैं,लेकिन आलम यह हैं कि इस मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को तकरीबन 4 किलोमीटर घनघोर जंगल के बीच में से सफर कर यहां पहुंचना पड़ता हैं। इस मंदिर में जाने के लिए सिर्फ सीढ़ीनुमा कच्चा रास्ता हैं जिससे होते हुए श्रद्धालुओं यहां पहुंचना पड़ रहा हैं।
इस मंदिर में लोगों की आस्था और श्रद्धा को देखते हुए यहां के स्थानीय लोग मंदिर को सुविधाओं से जोड़ने की मांग सरकार से कर रहे हैं। स्थानीय निवासी आशु का कहना है कि यह मंदिर जिस जगह पर स्थित है वहां पर न तो पानी की सुविधा है, न ही सड़क की सुविधा है लेकिन फिर भी हजारों श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है। अगर यहां सड़क की सुविधा सरकार दे तो यह मंदिर श्रद्धालुओं में ओर अधिक प्रसिद्ध होगा और यहां श्रद्धालुओं की संख्या में ओर अधिक बढ़ोतरी होगी।
वहीं गांववासी रविंदर शर्मा ने बताया कि यह माता का मंदिर बहुत पुराना हैं। हम जब से पैदा हुए हैं तब से देख रहे हैं कि इस माता के मंदिर में हजारों श्रद्धालुओं आ रहे हैं। माता के मंदिर तक पहुंचने के लिए पैदल रास्ता ह जिसमें बहुत चढ़ाई हैं। यहां बुजुर्ग, बच्चे महिलाएं सभी मंदिर जाने के लिए पहुंचते हैं। उन्हें परेशानी होती हैं। हम सरकार से अपील करते हैं कि इस मंदिर के लिए रास्ता बनाया जाए ताकि यहां आने वाले श्रद्धालुओं को आसानी हो सके।
उन्होंने बताया कि माता का मंदिर ऐसी जगह पर हैं कि यहां से आसपास लगते सभी इलाकों को देख सकते हैं। यहां तक कि मौसम साफ हो तो आप पंजाब के क्षेत्र भी देख सकते हैं। उन्होंने बताया कि जिस व्यक्ति ने मंदिर में भंडारा शुरू किया था उसने यहां मंदिर तक बिजली लाने में बहुत मेहनत की हैं। उन्होंने विभाग से बात करके वहां बिजली तो पहुंचा दी लेकिन पानी अभी तक यहां नहीं पहुंचा जिसकी कारण पानी खच्चरों से ऊपर पहुंचाना पड़ता हैं। मंदिर में भंडारा पच्चीस दिनों से चला हुआ है,यहां पर जो भी काम करते हैं वह सिर उठा कर सामान ऊपर मंदिर तक लेकर जाते हैं।
