Dharamshala, Rahul-प्रदेश में एक बार फिर देवता इंद्रूनाग ने बुरी शक्तियों पर विजय पाई है। देव युद्ध से लौटने के उपरांत खनियारा में उनका भव्य स्वागत हुआ। अघंजर महादेव मंदिर के समीप भक्तों ने विशेष पूजा-पाठ एवं खेलपात्र का आयोजन किया।
इंद्रूनाग के गुर ने बताया कि युद्ध के दौरान इंद्रूनाग देवता तथा उनके भाई तोरल नाग, मतड़ानाग और बुडू नाग को चोटें आई हैं। इनमें तीन-तीन घाव तोरल नाग और मतड़ानाग को तथा दो घाव बुडू नाग को लगे, साथ ही आधा दर्जन से अधिक भालों की चोट भी सहनी पड़ी। देवता की चिकित्सा हेतु अगले पांच दिनों तक मक्खन और चंदन का लेप किया जाएगा।इसके बाद राधाष्टमी के पावन पर्व पर इंद्रूनाग देवता शिव कैलाश स्थित मणिमहेश व धौलाधार श्रृंखला के नागडल में स्नान करेंगे। तत्पश्चात सम्ब्रलाहड़ स्थित उखाड़ा मंदिर से भव्य छड़ी यात्रा एवं पूजा-पाठ के साथ उन्हें पुनः खनियारा स्थित मंदिर लाया जाएगा।
मंदिर के पूजारी विपिन ने बताया कि देव युद्ध के उपरांत देवता को छड़ी यात्रा के माध्यम से मंदिर में लाकर विधिवत पूजा-अर्चना प्रारंभ हो चुकी है। आगामी दिनों में तीन वर्ष बाद होने वाली विशेष पूजा की तैयारियों के संकेत भी गुर द्वारा दिए गए हैं।
