संजीव महाजन,नूरपुर: प्रदेश के स्कूलों में कंप्यूटर शिक्षकों की सबलैटिंग को लेकर लिए गए सरकार के फ़ैसले को लेकर विरोध के स्वर बुलंद होने शुरू हो गए हैं। हिमाचल प्रदेश कंप्यूटर शिक्षक संघ ने राज्य सरकार के इस फैसले को लेकर कड़ा एतराज जताया हैं। उन्होंने एतराज जताते हुए कहा कि अब स्कूलों में आउटसोर्स पर रखे कंप्यूटर शिक्षकों को चार से पांच कंपनियों के अधीन अपनी सेवाएं देनी होगी। ज्वाली विधानसभा के लोक निर्माण विभाग विश्रामगृह में बैठक कर प्रदेश कंप्यूटर शिक्षक संघ ने चेतावनी दी है कि अगर राज्य सरकार कंप्यूटर शिक्षकों को विभिन्न कंपनियों के अधीन बांटती है तो संघ के सदस्य इसका जोरदार विरोध करेंगे।
संघ के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष दलजीत मन्हास व कानूनी सलाहकार भुवनेश शर्मा का कहना है कि बेहतर है कि हिमाचल प्रदेश इलेक्ट्रॉनिक कॉरपोरेशन के अधीन ही कंप्यूटर शिक्षकों को रहने दिया जाए। हिमाचल प्रदेश कंप्यूटर अनुदेशक संघ के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष दलजीत सिंह मन्हास और कानूनी सलाहकार भुवनेश शर्मा का कहना है कि पिछले करीब 20 वर्षों से कंप्यूटर शिक्षकों को हर सरकार ठगती आई हैं।
उनका आरोप हैं कि कंप्यूटर शिक्षकों के साथ राज्य सरकार हमेशा सौतेला व्यवहार करती आई हैं। जब भी विधानसभा चुनाव सिर पर होते हैं तो कंप्यूटर शिक्षकों को सरकार के अधीन लाकर पॉलिसी बनाने का सपना दिखाकर उनसे वोट ले लिए जाते हैं और सरकार बनने के बाद हर बार उन्हें किसी कंपनी के अधीन सौंप दिया जाता हैं लेकिन इस बार प्रदेश सरकार का यह सौतेला व्यवहार संघ किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेगा। कंप्यूटर शिक्षक संघ का कहना है कि हमारे कई भाई रिटायर होने की उम्र पर पहुंचने लगे हैं परंतु अभी तक उनका भविष्य अंधकारमय स्थिति में ही हैं। कुछ कंप्यूटर शिक्षकों ने तो अपने बच्चों की पढ़ाई या शादी के लिए ऋण तक ले रखा हैं। अगर यही हाल रहा तो उन्हें भूखे मरने की नौबत तक आ जाएगी और इसकी जिम्मेवारी राज्य सरकार की होगी।
