सोलन : योगेश शर्मा- कालका – शिमला एनएच पांच पर परवाणु से वाकनाघाट तक चल रहे फोरलेन निर्माण कार्य के दौरान फोरलेन की जद में आए मुआवजे के हकदरों को लेकर जिला प्रशासन ने कवायद तेज करते हुए 20 दिनों में 23 करोड़ रुपए संबंधित हकदारों की पहचान कर उन्हें वितरित कर दिए है। मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद जिला प्रशासन द्वारा इस कार्य में तेजी लाई गई है, अब सिर्फ डेढ़ करोड रुपए फोरलेन मुवावजे का हकदारों को दिया जाना है। प्रशासन ने केवल 20 दिनों में ही यह ₹23 करोड़ रुपए संबंधित हकदारों को ढूंढते हुए यह फोरलेन मुवाबजेकी राशि वितरित की है इसके लिए युद्ध स्तर पर एसडीम सोलन और उनकी टीम कार्य कर रहे हैं।
सीएम के निर्देशों के बाद सोलन में प्रशासन ने पकड़ी रफ्तार
एसडीम सोलन संजय स्वरूप ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद जिला में विशेष अभियान चलाया जा रहा है । 20 दिनों में 23 करोड फोरलेन मुआवजे का जिला प्रशासन द्वारा संबंधित हकदारों को दिया जाना था। जिसकी रिपोर्ट पटवारी और तहसीलदार द्वारा बनाई गई थी । पिछले सप्ताह प्रशासन द्वारा ₹11 करोड़ इन हकदारों को बांटे गए हैं । वही 6 करोड़ रुपए और दिया जाना था, जिसमे से अब सिर्फ डेढ़ करोड ही प्रशासन द्वारा मुवावजे के हकदारों को दिया जाना है। उन्होंने कहा कि उनके पास 15 से 20 परिवार ऐसे हैं , जो अब हकदार है उन्हें यह डेढ़ करोड़ रुपए फोरलेन मुवावजे का दिया जाना है और 30 मार्च तक इन्हें भी इनका यह पैसा दे दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सम्बंधित पटवारियों और तहसीलदारों को इस बारे में कहा गया है कि जल्द से जल्द उनके लीगल हेयर सर्टिफिकेट तैयार किए जाए ताकि उन्हें यह मुआवजा दिया जा सके। उन्होंने कहा जहां यह डेढ़ करोड़ रुपए का मुवावजा दिया जाना है, उसमे परवाणु से सोलन तक पहले चरण का क्षेत्र आता है । वही कंडाघाट से वाकनाघाट के क्षेत्र में सिर्फ 60 हज़ार रुपए दिए जाने है, बाकि का सारा पैसा परवाणु से सोलन तक के क्षेत्र का दिया जाना है।
30 मार्च को सौंपी जानी है रिपोर्ट
बता दें कि जिला प्रशासन सोलन पिछले कई वर्षों से परवाणु से वाकनाघाट तक फोरलेन की जद में आई जमीन के मुआवजे के हकदारों को ढूंढ रहा था क्योंकि इनकी जमीन से फोरलेन का निर्माण भी हो गया लेकिन इन्हें ढूंढने में प्रशासन को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था लेकिन मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद पटवारी और तहसीलदारों की एक टीम एसडीम सोलन द्वारा बनाई गई। जिसके बाद अब इनकी पहचान की गई है और मात्र डेढ़ करोड रुपए ही 30 मार्च तक अब प्रशासन द्वारा इसका लक्ष्य वितरित करने के लिए रखा है उसके बाद मुख्यमंत्री को इसके संबंध में रिपोर्ट भी दी जाएगी।
