मंडी :धर्मवीर (TSN)- मंडी जिला के सुंदरनगर की महिलाएं इन दिनों न केवल आत्मनिर्भर भारत की मिसाल पेश कर रही है, बल्कि लाखों रुपए कम कर अपनी आर्थिक की भी सुदृढ़ कर रही हैं। प्रदेश वन परितन्त्र और आजीविका सुधार परियोजना ने इन महिलाओं के होंसलों को नई उड़ान दी है। वन विभाग की जायका वानिकी परियोजना से सुन्दरनगर के महामाया स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने पहले बैग बनाने व कपडे़ सिलाई का प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद अब यह महिलाए घर द्वार पर ही लाखों रुपए कमा रही हैं।
100 रुपए से लेकर 500 रुपए तक के बनाती है बैग
महामाया स्वयं सहायता समूह की 12 महिलाएं प्रशिक्षण के बाद दो महीनों में ही लगभग 2 लाख रुपए धनराशि कमा चुकी हैं।समूह की इन महिलाओं को जायका वानिकी परियोजना के अर्न्तगत वन विभाग के माध्यम से 28-28 दिन की कपड़े की सिलाई और बैग बनाने की निःशुल्क ट्रेनिंग प्रदान की गई। इस दौरान उन्होंने जूट से लंच बैग,बोतल बैग, फाइल बैग आदि बनाने की भी जानकारी दी गई। प्रशिक्षण लेने के उपरांत महिलाएं बैगों को दुकानों, स्कूलों, मेलों में बेचती है और ऑर्डर पर भी बैग बनाती हैं।महिलाएं 100 रुपये से लेकर 500 रुपए तक के बैग बनाती हैं। साथ ही गांव व आसपास के क्षेत्र की महिलाओं के सूट की सिलाई घर पर ही करती हैं। इन महिलाओं का कहना है कि वन विभाग जाइका की तरफ से उसे विभिन्न जिलों में ट्रेनर के रूप में जाने का भी मौका मिला है। जो कि उसके लिए एक रोजगार का साधन बन गया है।
वहीं डीएफओ सुकेत राकेश कटोच ने कहा कि स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को बताया जा रहा है कि समूह के माध्यम से महिलाएं किस प्रकार जायका द्वारा मिलने वाली योजनाओं का लाभ उठा सकती है। महिलाओं को स्वरोजगार पर बल देकर और स्वयं सहायता समूह बनाकर महिलाओं को समूह को आगे बढ़ने एवं विभिन्न प्रकार के छोटे उद्यम लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं घर बैठे काम कर आर्थिकी को मजबूत करने में जुटी हैं।
