संजीव महाजन,नूरपुर(TSN): हिमाचल प्रदेश के गर्म क्षेत्र में सेब का बगीचा ओर नर्सरी तैयार कर तिलक राज ने एक अलग मिसाल पेश की हैं। विकास खंड फतेहपुर के तहत ग्राम पंचायत ढसोली के गांव कन्याट (नियाल) के सेवानिवृत्त जूनियर इंजीनियर तिलक राज ने अपनी कड़ी मेहनत, लग्न और जज्बे को दिखते हुए गर्म क्षेत्रो में पैदा होने वाले सेबों का बाग और सेब के पौधे की नर्सरी लगाने में सफलता हासिल की हैं। उन्हें यह प्ररेणा एक समाचारपत्र में छपे आर्टिकल से मिली जिसने उनकी सोच को दूसरे फलदार पौधो के साथ इन पौधों को लगाने की दिशा दिखाकर उन्हें इस कामयाबी के शिखर पर पहुंचा दिया हैं।
आज के समय में तिलक गर्म क्षेत्रों में उगाए जाने वाले तीन प्रजातियों के सेब के पौधे जैसे कि अन्ना, डोर सैट गोलडन, हरिमन को तैयार करके बागवानों को इसकी पौध दे रहे हैं। यहां नर्सरी के तैयार पौधों को देश के विभिन्न गर्म क्षेत्रों में पैदावार के लिए भेजा रहा हैं।
तिलक राज ने बताया कि मैं बिजली विभाग से सेवानिवृत्त जूनियर इंजीनियर की नौकरी करता था और जब रिटायर्ड हुआ तो मैंने एक समाचारपत्र में किसी का लेख पढ़ा। मैंने सोचा क्यों नहीं इस व्यक्ति से मुलाकात की जाए तो मैं शाहपुर के गांव दरगेला पूर्ण चंद के पास गया तो मैंने वहां देखा कि उन्होंने गर्म क्षेत्र में होने वाले सेबों का बाग लगाया हुआ हैं। मैंने उनसे जानकारी ली। मैं वहां से कुछ पौधे लेकर आया और अपने यहां लगाए तो मुझे कुछ अच्छा लगा और मैंने सोचा क्यों ना मेहनत की जाए तो मैंने वर्ष 2019 में सेब के 20 पौधे लगाए थे, जिन्होंने तीन साल बाद जून 2023 मै फल देना शुरू किया। प्रत्येक पौधे पर 10- 12 फल लगे थे। उनका आकर और रंग बिल्कुल सही था।
उन्होंने कहा कि सेब के पौधे लगाने के साथ ही उन्होंने सेब के पौधों की नर्सरी भी शुरू की। इस समय उनकी नर्सरी में पांच हजार पौधा तैयार है और एक पौधे कीमत 150 रूपए हैं। अब तक इस समय लगभग 600 पौधे बेच चुके हैं। उद्यान कृषि विभाग फतेहपुर और जाच्छ अनुसंधान केन्द्र के अधिकारियों और कर्मचारियों ने इस कार्य में उनका पूरा सहयोग किया हैं।
तिलक ने बताया की समय समय पर नर्सरी को चैक करते रहते थे। पानी की समास्या को दूर करने के लिए मैंने बोरिंग पंप भी लगाया हुआ हैं जिसमें मुझे विभाग ने सब्सिडी देकर मेरी मदद की हैं। मैं फतेहपुर विभाग ,जाच्छ अनुसंधान के अधिकारियों का धन्यवाद करता हूं जिन्होंने मेरी समय समय पर मदद की है और मुझे इस काम को करने में मार्गदर्शन दिया। उन्हीं की बदौलत आज मैं यहां पहुंचा हूं। उन्होंने सभी किसान बागवान भाईयों से अपील है कि वह भी आम या दूसरे पौधों के साथ साथ सेब के पौधों को लगाए। वह हमारे यहां से गर्म क्षेत्रों में उगाए जाने वाले पौधे ले सकते हैं और हम हर तरह की निःशुल्क मदद उनको प्रदान करेंगे।
