अनिल कुमार,किन्नौर: प्रदेश में इस बार मई माह में भी मौसम अपने कड़े तेवर दिखा रहा हैं। इस दौरान जहां प्रदेश में गर्मी का प्रकोप बढ़ना था तो वहीं सर्दियों का मौसम मई माह में प्रदेश में बना हुआ हैं। प्रदेश के मैदानी इलाकों में जहां बारिश ने अपना कहर बरपाया है तो वहीं ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मई माह में हो रही बर्फबारी अब किसानों बागवानों के लिए परेशानी का सबब बन गई हैं। ज़िला किन्नौर में इस मर्तबा मई महीने में भी दिसंबर माह की भांति ठंड बढ़ गई हैं। ज़िला के ऊंचे ग्रामीण इलाकों में बर्फबारी तो निचले इलाकों में बारिश की वजह से ठंड जाने का नाम ही नहीं ले रही हैं। किन्नौर ज़िला अबतक शीत लहर की चपेट में हैं और लोगों ने दोबारा से गर्म वस्त्र पहनने शुरू कर दिए हैं।
किन्नौर ज़िला सेब बहुल क्षेत्र हैं। यहां पर प्रतिवर्ष करीब 33 से 35 लाख सेब की पेटिया मंडी तक पहुंचती हैं लेकिन इस वर्ष मई महीने में बर्फबारी के बाद बागवानों के सेब की फ़सल पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता नज़र आ रहा ह क्योंकि बर्फबारी के बाद सेब के पेड़ो की टहनियां टूटने के साथ फ्लावरिंग पर भी इसका असर देखने को मिला हैं। इस तरह के नुकसान को देखते हुए भगवान इस बार सेब की फ़सल कम होने की आशंका भी जता रहे हैं, हालांकि ज़िला के निचले क्षेत्रों मे सेब के फूलों की अच्छी सेटिंग बताई जा रही हैं। निचले क्षेत्रों मे अधिक बारिश को नुकसान दायक भी बताया जा रहा हैं।
ज़िला किन्नौर के छितकुल व रकछम में करीब 7 से 8 इंच तक बर्फबारी हुई हैं। वहीं आसरंग व लिप्पा गांव के ऊंचे क्षेत्रों के करीब 8 इंच व कुनो चारंग की पहाड़ियों पर भी 9 इंच के आसपास बर्फबारी हुई हैं, ऐसे ने इन क्षेत्रों मे ठंड के चलते ग्रामीण पिछले 5 दिनों से घरों में आग़ का सहारा ले रहे हैं। वहीं अगर सड़कों की बात की जाए तो बर्फबारी व बारिश के चलते ज़िला के निगुलसरी समीप भी पहाड़ो से पत्थर गिर रहे है इस बाबत प्रशासन ने लोगों को सावधानी बरतने की भी सलाह दी हैं।
