योगेश शर्मा, सोलन: हिमाचल को सेब राज्य के रूप में भी जाना जाता है। ऐसा इसलिए कियुकीं हिमाचल में सेब की पैदावार काफी ज्यादा होती है और यहां से सेब बाहर भी जाता है लेकिन जिन मंडियों से सेब बाहर भेजा जाता है और जहां यह करोड़ो का सेब कारोबार होता है वह मंडियां ही खस्ताहाल है। बात की जाए सोलन की सब्जी मंडी की तो यह मंडी में बरसात के दिनों में कीचड़ से भरी पड़ी है। यहां बरसात के दिनों में मिट्टी के ढेर पर आढ़ती सेब का व्यापार करने को मजबूर है, टिन के शेड में ही सेब व्यापार चल रहा है,लेकिन हैरत वाली बात यह है कि बरसात के दिनों जहां एक तरफ दलदल से यहां पर व्यापार कर पाना मुश्किल हो रहा है वहीं दूसरी तरफ गंदगी भी हर जगह फैली हुई है।
बाहरी राज्य से सोलन पहुंचे आढ़ती पवन मलिक और छोटू ने बताया कि वे हर साल यहां पर आकर सेब का व्यापार करते है लेकिन इस बार जिस तरह से यहां सुविधाएं नहीं मिल पा रही है उससे व्यापार करना मुश्किल हो रहा है,यहां न तो केंटीन की सुविधा है और न ही पीने के पानी की व्यापारियों को रोजाना मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि यहां बरसात में मिट्टी दलदल बन चुकी है ऐसे में गाड़ियां लोड़ अनलोड करने में भी दिक्कत आ रही है।
अभी तो सेब सीजन की शुरूआत ही है। आने वाले दिनों में सेब का रश बढ़ेगा। बरसात से कीचड़ की समस्या भी बढ़ेगी। इससे कारोबार प्रभावित होगा। शैड बनाने के काम के कारण जगह की भी काफी कमी हो गई है। बता दे कि हिमाचल में सेब सीजन जोर पकड़ने लगा है। सोलन मंडी में भी बड़ी संख्या में सेब की पेटियां पहुंच रही हैं, लेकिन यहां बीच सीजन में शैड बनाने का काम चल रहा है जिससे एक तो जगह की कमी हो गई, साथ ही मलबे और बारिश के कारण कीचड़ भर गया है। इससे बड़ी गाड़ियां तो मंडी के अंदर आ ही नहीं पा रहीं। छोटी गाड़ियां आ रही हैं, इन्हें भी फिसलन का सामना करना पड़ रहा है।
रोजाना मंडी पहुंच रही 10 से 12 हज़ार सेब की पेटियां
सब्जी मंडी सोलन में इन दिनों सेब का व्यापार जोरो शोरो पर है। रोजाना 10 से 12 हज़ार सेब की पेटियां सब्जी मंडी पहुंच रही है,लेकिन अव्यवस्थाओं का आलम इतना है कि बाहरी राज्यों से आने वाले आढ़तियों के साथ साथ मंडी में आने वाले किसान बागवान परेशान दिखाई दे रहे है। बाहरी राज्यों से इस बार सेब मंडी में आढ़ती भी कम आ रहे है कारण यह है कि न तो यहां पर रहने की उचित सुविधा है और न ही गाड़ी खड़ी करने और न ही पीने के पानी की सुविधा। आलम यह है कि आढ़तियों के कम आने से व्यापार भी खासा असर देखने को मिल रहा हैं।
हर साल करीब 150 से 200 करोड़ का होता है कारोबार
सोलन सेब मंडी में पहले ही मलबे के ढेर पर बनी है। उस पर इस सीजन के बीच में यहां पर पक्के शैड बनाने का काम शुरू किया गया है। अभी इसमें काफी समय लगेगा। इस सेब मंडी में हर साल करीब सीजन में करीब 150 से 200 करोड़ रुपए के सेब का कारोबार होता है। इसके साथ सोलन मार्केटिंग कमेटी के अधीन आने वाली परवाणू सेब मंडी में भी इतना करोबार होता है। पिछले साल अकेले सोलन मंडी में करीब 12 लाख सेब की पेटियां पहुंची थी। इस बार सेब पिछले साल की अपेक्षा ज्यादा है।
सब्जी मंडी सोलन के अधिकारी
मार्केटिंग कमेटी सोलन के नीलामी अधिकारी व्यास देव ने कहा कि शैड बनाने का काम आढ़तियों और ग्रोवर की सुविधा के लिए ही करवाया जा रहा है। आने वाले दिनों में इसका लाभ इन्हें ही मिलने वाला है। अभी जरूर समस्या हो रही है। कुछ आढ़तियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था भी की गई है।
