अनिल कुमार,किन्नौर: किन्नौर जिला में शतप्रतिशत संस्थागत प्रसूति सुनिश्चित करने के लिए गर्भवती प्रवासी महिलाओं के लिए विशेष जागरूकता शिविर आयोजित करने के निर्देश उपायुक्त ने दिए हैं। उपायुक्त ने शनिवार को यहां उपायुक्त कार्यालय के सभागार में आयोजित नियमित टीकाकरण और बाल स्वास्थ्य को लेकर गठित जिला टास्क फोर्स की बैठक की अध्यक्षता की। उपायुक्त किन्नौर तोरूल एस रवीश ने स्वास्थ्य विभाग को यह निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने बताया कि जिला में संस्थागत प्रसूति दर लगभग 90 प्रतिशत हैं। D
बैठक में बताया गया कि जिला में कुल प्रसवपूर्व देखभाल पंजीकरण 88 प्रतिशत से अधिक है जोकि अन्य जिलों से बेहतर हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने कहा कि शिशु मृत्यु दर को शून्य करने के दिशा में कार्य करें और इसके लिए लोगों को जागरूक करें ताकि किशोर गर्भावस्था के मामलों में कमी दर्ज हो सके। बैठक में बताया गया कि जिला में नवजात से लेकर एक वर्ष तक के बच्चों के टीकाकरण का 82 प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया गया है जिस पर उपायुक्त ने यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए की कोई भी बच्चा टीकाकरण से वंचित न रहे।
इसके अतिरिक्त, पेंटा-1, पेंटा-3, रोटा वायरस वैक्सीन, एमआर 1-विटामिन ए की पहली डोज, हेपेटाइटिस बी आदि टीकाकरण की शत प्रतिशत डोज देना सुनिश्चित किया गया हैं। जिला में टीकाकरण के 395 सत्र आयोजित करने का लक्ष्य रखा गया था जिसे शत प्रतिशत पूरा किया गया हैं। पोषण अभियान के तहत चल रही गतिविधियों पर चर्चा करते हुए उपायुक्त ने महिला एवं बाल विकासओर स्वास्थ्य विभागों को हर माह की 22 तारीख को गंभीर तीव्र कुपोषण और मध्यम तीव्र कुपोषण के मामलों की जांच करने के निर्देश दिए। इसके अतिरिक्त, उन्होंने सरकारी स्कूलों में पहली से लेकर पांचवी कक्षा तक तथा छठी से लेकर बारवीं कक्षा तक के बच्चों को दी जा रही साप्ताहिक आयरन और फोलिक एसिड की गोलियों को प्राइवेट स्कूलों के सभी बच्चों को भी देने के निर्देश दिए।
उपायुक्त ने एनीमिया मुक्त हिमाचल अभियान के तहत बच्चों में एनीमिया की कमी को दूर करने के लिए किये जा रहे प्रयासों की जानकारी लेते हुए स्वास्थ्य तथा शिक्षा विभाग को बच्चों के अभिभावकों को पेरेंट टीचर मीटिंग में सही पोषण बारे जागरूक करने और अधिक से अधिक लोगों को इस बारे जागरूक करने के लिए शिविर आयोजित करने के निर्देश दिए। इसके अतिरिक्त, उन्होंने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए रिफ्रेशर कोर्स आयोजित करने और मास्टर ट्रेनर तैयार करने के निर्देश दिए ताकि जिला में कोई भी बच्चा एनीमिया से पीड़ित न हो।
