कुल्लू : मनमिंन्द्र अरोड़ा – आयुष्मान के लिए आश बाल विकास केंद्र वरदान बना है। यह बात लग घाटी की हेम लता ने अपने बच्चे आयुष्मान के स्वस्थ होने कही। उन्होंने कहा कि उनके पांच वर्षीय बच्चे आयुष्मान में पिछले कुछ समय से बहुत सी दिक्कतें सामने आई थी। जैसे बातचीत करने में पिछड़ापन, पढ़ाई में बिल्कुल भी ध्यान न देना, पढ़ाई कि किसी भी किताब और सामग्री को पकडऩे में रूचि नहीं दिखाना, बहुत ज्यादा गुस्सा और जिद्दीपन और
एक जगह पर नहीं बैठना आदि। ये सारी दिक्कतें पूरे परिवार के लिए एक चिंता का विषय बन चुकी थी, जब आश बाल विकास केंद्र की सेवाओं के बारे में पता चला तो उन्होंने 23 दिसंबर को पहली बार बच्चे को लाया, जहां पर उन्होंने अपनी उपरोक्त दिक्कतों को केंद्र के आक्यूपैशनल थैरेपिस्ट डा. आर्य एम के सामने रखा। जहां डा. आर्य एम नेे आयुष्मान का 2 दिन का असेस्मेंट और ऑब्जर्वेशन सत्र लिया, जिसमें उन्होंने प्रतिक्रियाओं को पहचान कर सूची वध किया। उन्होंने कहा कि हाथ को बिना वजह हिलाते रहना, एक जगह पर बैठता नहीं, बातों को बार-बार रिपीट करना, टेकटाइल देफेंसिव (किसी भी चीज को पकड़ने से डरना और चमकने वाली चीजों से डरना), ग्रेविटेशन इन सिक्योरिटी (ऊंचाई से डरना), चीजों को बिना मतलब से फेंकना, बाल काटने व सर व मुंह में क्रीम व तेल लगाने नहीं देता था। स्वयं खाना नहीं खाना, स्वयं कपड़े नहीं पहनता, स्वयं टॉयलेट नहीं जाना, दूसरों के साथ नहीं खेलना और दूसरे बच्चे को चोट पंहुचाना। ये सारी परेशानियां आयुष्मान के माता-पिता के परिवार में बड़े झटके से कम नहीं था। उसके बाद डा. आर्य एम ने आयुष्मान के केस को निदेशक डा. श्रुति भारद्वाज से चर्चा में लाया। वहां से निष्कर्ष निकला कि बच्चे को किस तरह से थेरेपी योजना बनानी है।
26 दिसंबर से शुरू की थेरेपी, धीरे-धीरे आया बदलाव
डा. आर्य एम ने आयुष्मान को 26 दिसंबर से थेरेपी सत्र शुरू करने के लिए कहा और उसके बाद आयुष्मान को पहली बार 26 दिसंबर से थेरेपी देना आरंभ किया।धीरे-धीरे जब आयुष्मान के व्यवहार में बदलाव आया तो दिन में तीन-तीन सत्र दिए जाने लगे। 17 अप्रैल 2023 के आते-आते तक लगभग चार महीने की थेरेपी सेवाओं से आज आयुष्मान के जीवन में बहुत सकारात्मक बदलाव हुए हैं, जिससे परिवार काफी खुश भी है।
