बिलासपुर:सुभाष ठाकुर – हिमाचल प्रदेश परिवहन विभाग द्वारा टैक्सियों में जीपीएस सिस्टम लगाना अनिवार्य है , लेकिन जीपीएस सिस्टम की इस अनिवार्यता के चलते अब टैक्सी चालकों की परेशानियां बढ़ गई हैं और इसको लेकर विरोध शुरू हो गया है।
टेक्सी आपरेटरों की माने तो जिन कंपनियों को सरकार द्वारा जीपीएस सिस्टम लगाने के लिए पंजीकृत किया गया था, अब वह कंपनियां प्रदेश छोड़कर जा चुकी है । ऑपरेटरों को सिस्टम को रिचार्ज नहीं करवा पा रहे हैं और परमिट को दोबारा रिन्यू करवाने के लिए नया सिस्टम लगवाना पड़ रहा है। सिर्फ एक ही कंपनी है जो यह काम कर रही है और उसके दाम बहुत ज्यादा है तथा इसका कोई भी फायदा टैक्सी संचालकों को नहीं हो रहा है।
टैक्सी ऑपरेटर यूनियन ने बताई समस्या
शिवा टैक्सी ऑपरेटर यूनियन घुमारवीं के प्रधान रामगोपाल बब्बी तथा पूर्व प्रधान सुरेश शर्मा का कहना है जीपीएस सिस्टम ना होने के चलते कागजात पूरे नहीं हो पा रहे हैं। क्योंकि बिना सिस्टम के उनका ना तो परमिट रिन्यू हो पा रहा है और न ही अन्य काम हो पा रहे हैं ।जिसका नुकसान टैक्सी ऑपरेटरों को भुगतना पड़ रहा है ।सुरेश शर्मा ने बताया कि उन्होंने दो साल पहले जब नई गाड़ी ली थी तो उसमें परमिट के लिए जीपीएस सिस्टम लगवाना जरूरी बताया गया ।उन्होंने सरकार द्वारा पंजीकृत कंपनी से 15 हजार रुपये खर्च करके जीपीएस सिस्टम लगवाया था, जिसे 2 साल बाद दोबारा से रिचार्ज करवाना पड़ना था जिसका खर्चा दो हजार रुपये आना था। लेकिन अब वह कंपनी हिमाचल छोड़ कर के जा चुकी है इसलिए उन्हें अपने परमिट को रिन्यू करवाने के लिए अब दोबारा से 15 हजार रुपये की भारी भरकम राशि खर्च कर नई कंपनी का जीपीएस सिस्टम लगवाना पड़ा। उन्होंने कहा कि इससे उनके ऊपर आर्थिक बोझ दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है ।ऐसे में उन्होंने सरकार से मांग की है कि जल्द टैक्सी में लगने वाले जीपीएस सिस्टम को रद्द करें।
टैक्सी के परमिट को बढ़ाने की मांग
यूनियन ने टैक्सी के परमिट को बढ़ाने की मांग भी की है। उन्होंने कहा कि वह हर बार सरकारों से परमिट की अवधि को बढ़ाने की मांग करते हैं लेकिन किसी भी सरकार ने उनकी मांग पूरी नहीं की है उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से मांग की है कि परमिट की अवधि को 10 से 15 साल किया जाए ।
