शिमला, संजू-:भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश मीडिया संयोजक कर्ण नंदा ने आरडीजी ग्रांट को लेकर कांग्रेस सरकार पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने न तो सरकार गिरने की कोई बात कही है और न ही कर्मचारियों के वेतन, पेंशन या ओपीएस बंद होने जैसे किसी मुद्दे को उठाया है। यह पूरा नैरेटिव कांग्रेस सरकार द्वारा खुद गढ़ा जा रहा है, ताकि अपनी वित्तीय विफलताओं से ध्यान भटकाया जा सके।
कर्ण नंदा ने स्पष्ट किया कि भाजपा नेताओं ने केवल संगठनात्मक मजबूती के तहत कार्यकर्ताओं को आगामी सभी चुनावों के लिए तैयार रहने का आह्वान किया है। इसे राजनीतिक अस्थिरता से जोड़कर पेश करना पूरी तरह भ्रामक है। उन्होंने कहा कि आरडीजी बंद होने के बाद स्वयं मुख्यमंत्री की चिंता सामने आ रही है, क्योंकि सरकार प्रदेश की वित्तीय व्यवस्था को इसी अनुदान के सहारे चलाने की सोच रही थी।
उन्होंने आरोप लगाया कि “आत्मनिर्भर हिमाचल” का नारा देने वाली कांग्रेस सरकार अब वित्तीय चुनौतियों पर ठोस रोडमैप देने के बजाय डर का माहौल बना रही है। हाल ही में वित्त विभाग की प्रस्तुति में डीए, टीए और अन्य कर्मचारी लाभों पर संकट के संकेत दिए गए, जिससे लगभग ₹13,000 करोड़ के लाभों को लेकर असमंजस पैदा हुआ। यह भ्रम भाजपा ने नहीं, बल्कि सरकार की अपनी स्लाइड्स और दस्तावेज़ों से उत्पन्न हुआ है।
कर्ण नंदा ने कहा कि देश के अन्य कांग्रेस शासित राज्यों ने आरडीजी बंद होने पर ऐसा राजनीतिक शोर नहीं मचाया। कुछ राज्यों ने तो वित्त आयोग से स्वयं आरडीजी समाप्त करने का अनुरोध किया था। उन्होंने सरकार से अपील की कि वह खर्चों में कटौती, फिजूलखर्ची पर रोक और आमदनी के नए स्रोत विकसित करने पर ध्यान दे।उन्होंने कहा कि बढ़े हुए प्रोटोकॉल, बड़े काफिले, चेयरमैनों और पदाधिकारियों की सुविधाओं की समीक्षा जरूरी है। भाजपा ने स्पष्ट किया कि वह प्रदेशहित में हर रचनात्मक सुझाव और सहयोग के लिए तैयार है, लेकिन जनता को डराने की राजनीति स्वीकार नहीं की जाएगी।
Chandrika
