मंडी,धर्मवीर(TSN)-देश की सांस्कृतिक राजधानी कहे जाने वाली छोटी काशी मंडी के अनेकों शिवालयों में 27 जनवरी की तारा रात्रि से बाबा भोलेनाथ के घृत कंबल रूपी श्रृंगार रस्में लगातार जारी है।इन शिवालयों में बाबा भोलेनाथ रोजाना नए स्वरूप में अपने भक्तों को दर्शन दे रहे हैं।शहर के बीचोबीच विराजमान नीलकंठ महादेव मंदिर में भी बाबा के माखन रूपी श्रृंगार की रस्में भी पिछले कई सालों से निभाई जा रही हैं।
हिमाचल का एक मात्र मंदिर जहां गर्भगृह में मौजूद है, भोलेनाथ का सबसे बड़ा शिवलिंग
शिखर शैली में बना यह मंदिर हिमाचल का एक एकमात्र ऐसा मंदिर है जहाँ मंदिर के गर्भगृह में बाबा भोलेनाथ का सबसे बड़ा शिवलिंग मौजूद है।मंदिर के पुजारी चंदन कटोच ने बताया कि यहां के स्थानीय युवाओं को साथ लेकर उन्होने इस बाबा के माखन रूपी श्रृंगार की रस्मों को शुरू किया था।पिछले 16 सालों से यह रस्में मंदिर में लगातार निभाई जा रही हैं।इस पहल को करने से आज जहां स्थानीय युवा धर्म पथ पर आगे बढ़ रहें हैं,वहीं नशे जैसी बुराइंयों से भी अपने आप को दूर रख रहें हैं।घृतकंबल श्रृंगार के 17वें दिन यानि सोमवार को नीलकंठ महादेव माता श्यामाकाली के रूप नीलकंठ महोदव का श्रृंगार किया गया है। मंदिर में स्थायी पुजारी न होने के कारण यहां के स्थानीय लोगों व युवाओं द्वारा ही सुबह शाम बाबा की आरती की जाती है।पौराणिक धर्म ग्रंथों के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान निकले विष का पान करने के बाद भगवान भोलेनाथ नीलकंठ कहलाए। वहीं सदियों पुराने छोटी काशी के इस मंदिर में विराजमान नीलकंठ महादेव के शिवलिंग की बात की जाए तो जलाभिषेक करने पर यह शिवलिंग स्वतः ही गहरे नीले रंग में परिवर्तित हो जाता है।
