चन्द्रिका- हिमाचल के कुल्लू मनाली में हिडिंबा मंदिर एक प्रसिद्ध मन्दिर है जिसका इतिहास पांडवो के समय से जुड़ा है। दैवीय शक्तियां प्राप्त कर असुरों का नाश कर राक्षस से देवी बनी महाकाली स्वरूप कुल्लू घाटी की अराध्य देवी माता हिडिंबा पर लोगों की अपार आस्था है। देवी हिडिम्बा पाण्डव भीम की पत्नी थी।
पौराणिक कथा अनुसार इस तरह बनी देवी
हिमाचल प्रदेश के कुल्लू मनाली में देवी हिडिम्बा का मंदिर है। जब जुए में पांडव अपना सबकुछ हार गए थे ,तो दुर्योधन शर्त के अनुसार इनको वारणावत नाम के जगह भेज देता है। यही पर दुर्योधन पांडवो को महल में जिन्दा जलाने की साजिश करता है ,लेकिन समय रहते पांडवो को इसका पता चल जाता है और वो लोग सुरंग के रास्ते जंगल में निकल जाते है। उस जंगल में हिडिम्ब रहता था उसने अपनी बेहन को पांडवो को पकड़ कर भोजन के लिए लाने को कहा ,हिडिम्बा पांडवो की तलाश में जाती है जहा उसकी मुलाकात भीम से होती है और वो उनपर मोहित हो जाती है। भीम के परिचय पूछने पर वो अपना और अपने भाई परिचय देती है ,तभी हिडिम्ब भी आ जाता है और यह सब देखकर क्रोधित होकर अपनी बहन हिडिम्बा पर वार करता है ,लेकिन भीम हिडिम्ब को मारकर हिडिम्बा को बचा लेता है।भीम से विवाह के बाद हिडिम्बा मानवी बन जाती है ,और अब वो देवी के रूप में पूजी जाती है। मनाली में इनका बहुत भव्य और सुंदर मंदिर है। यहाँ पर देवी को ग्राम देवी के रूप में भी पूजा जाता है।
देवी हिडिंबा के आगमन के बाद ही शुरू होता है अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा
मनाली से एक किलोमीटर दूर देवदार के घने व ऊंचे जंगलों के बीच लगभग 82 फुट ऊंचे पगौड़ा शैली के इस मंदिर को कुल्लू के राजा बहादुर ने सन् 1553 में बनवाया था। मंदिर के अंदर माता हिडिंबा की चरण पादुका हैं। माता जन्म से राक्षसी थी लेकिन तप व त्याग के बाद देवी मानी गई। कुल्लत राजवंश की दादी कही जाने वाली माता हिडिंबा के आगमन के बाद ही अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरे का आगमन होता है।
