राहुल चावला, कांगड़ा: प्रदेश में बरसात के इन दिनों में कई तरह की बीमारियां पनप रही हैं। इसी बीच प्रदेश में कई जिलों में आई फ्लू के मामले सामने आ रहे हैं। बात अगर जिला कांगड़ा की कि जाए तो यहां आई फ्लू वायरस का प्रकोप बढ़ता जा रहा है और लगातार लोग इसकी चपेट में आ रहे हैं। कांगड़ा के तमाम अस्पतालों में 35 से 40 मरीज हर रोज पहुंच रहे हैं, जबकि वर्तमान में 3 सौ से ज़्यादा मामले आईफ़्लू के दर्ज किए जा चुके हैं।
आई फ्लू का यह वायरस दूधमुंहे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में पाया जा रहा हैं। सुगर के मरीजों में इसके लक्षण ज़्यादा ही पाए जा रहे हैं। दरअसल ये रोग संक्रमण का रोग है, छुआछूत से भी इसके फैलने के ज़्यादा चांसेज रहते हैं, इसकी वजह से लोगों की आंखों में लालगी पाई जा रही हैं। आंखों से व्हाइट और यलो डिस्चार्ज होता हैं। अमूमन सुबह उठते समय आंखे चिपकी रहती हैं, सुगर के मरीजों की आंखों में सुबह के समय सूजन ज़्यादा रहती हैं।
कांगड़ा में बढ़ रहे के मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य महकमा ख़ास तौर पर धर्मशाला और टांडा मेडिकल में नेत्र रोग विशेषज्ञ विभाग पूरी तरह से अलर्ट मोड पर हैं। यहां हर रोज सैकड़ों लोग अपनी आंखों के।चैक अप के लिए आ रहे हैं जिनमें से से 30 से 40 लोगों में आइफ़्लू के ही लक्षण पाए जा रहे हैं। सीएमओ कांगड़ा डॉक्टर सुशील शर्मा की मानें तो इस वाइरल की वजह से ओपीडी फुल रह रही हैं। मामले लगातार बढ़ रहे हैं ऐसे में लोगों को एहतियात बरतने की सलाह दी जा रही हैं।
उन्हें अपनी हाइजीन मेंटेन करने की सलाह दी जा रही है, क्योंकि ये छुआछूत का रोग है इसलिए वायरल ज़्यादा न बढ़े उसके लिए रोगी और स्वस्थ व्यक्ति के बीच गैप होना लाजमी हैं। रोगी को काला चश्मा पहनना चाहिए ताकि दूसरा कोई उनके संपर्क में आने से वायरल का शिकार न हो।
ख़ुद न बने खुद के डॉक्टर
धर्मशाला नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉक्टर शैलेन्द्र मिन्हास ने कहा कि क्योंकि उनके यहां आए दिन मरीजों की संख्या बढ़ रही है और ज्यादातर मरीज गांवों से आ रहे हैं जो कि पहले ख़ुद से कैमिस्ट या स्थानीय चिकित्सकों के घरेलू नुस्खों को अपना कर ज़्यादा प्रभावित हुए हैं। कई मरीज स्टेरॉइड लेकर चार पांच दिन में ठीक हो जा रहे हैं मगर कुछ दिन के बाद वो फिर इस बीमारी का शिकार हो जा रहे हैं। ऐसे में लोगों को सलाह दी जाती है कि घरेलू नुस्खों की बजाय सीधे नेत्र रोग विशेषज्ञ की सलाह लें। कम से कम तीन से चार हफ़्ते तक इसका कोर्स करें तभी जाकर आंखों को पूर्णत आराम मिल सकता हैं अन्यथा इसका लंबे समय के लिए भी खामियाजा भुगतना पड़ सकता हैं
