Shimla,23 December-:हिमाचल प्रदेश के पारंपरिक स्ट्रीट फूड को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। शिमला संसदीय क्षेत्र के सांसद सुरेश कुमार कश्यप ने कहा कि स्ट्रीट फूड केवल भोजन नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विविधता और “अनेकता में एकता” की जीवंत अभिव्यक्ति है। उन्होंने कहा कि भारत के हर क्षेत्र का खान–पान वहां की संस्कृति, परंपरा और जीवनशैली को दर्शाता है, जो दुनिया में इसे विशिष्ट बनाता है।यह विचार उन्होंने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, समरहिल, शिमला में आयोजित स्ट्रीट फूड विक्रेता प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यशाला को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
कार्यशाला का आयोजन भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI), उत्तरी क्षेत्र कार्यालय, गाजियाबाद द्वारा किया गया, जबकि इसका संयोजन स्वास्थ्य सुरक्षा एवं विनियमन निदेशालय ने किया।सांसद कश्यप ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की समृद्ध संस्कृति के साथ-साथ यहां का स्ट्रीट फूड भी अपनी अलग पहचान रखता है। यह न केवल लोगों को स्वादिष्ट भोजन उपलब्ध कराता है, बल्कि हजारों परिवारों की आजीविका का सशक्त माध्यम भी है। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम स्ट्रीट वेंडर्स को स्वच्छता, गुणवत्ता, व्यक्तिगत साफ-सफाई और खाद्य सुरक्षा के प्रति जागरूक बनाते हैं, जिससे उपभोक्ताओं का विश्वास बढ़ता है।उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्ट्रीट वेंडर्स के लिए चलाई जा रही प्रधानमंत्री स्व-निधि योजना, विश्वकर्मा योजना और स्वरोजगार आधारित कार्यक्रमों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन योजनाओं से छोटे व्यवसायियों को आत्मनिर्भर बनने में बड़ी मदद मिल रही है। डिजिटल भुगतान और तकनीक के उपयोग से स्ट्रीट वेंडर्स भी मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जुड़ रहे हैं।कार्यक्रम के अंत में प्रशिक्षण पूर्ण करने वाले स्ट्रीट वेंडर्स को प्रमाणपत्र वितरित किए गए। वेंडर्स ने भी प्रशिक्षण को उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे उन्हें साफ-सफाई और भोजन की गुणवत्ता बनाए रखने की बेहतर समझ मिली है।
Chandrika
