अरविंदर सिंह,हमीरपुर: मानसिक स्वास्थ्य एक्ट के ऊपर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन सोमवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी हमीरपुर डॉ. आर. के. अग्निहोत्री की अध्यक्षता में किया गया। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन हिमाचल प्रदेश के तहत चल रही राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण की ओर से वित्पोषित इस कार्यशाला में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी हुई समस्याओं के प्रबंधन ओर बचाव और मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम 2017 के बारे में विस्तृत रूप से चर्चा की गई ।
इस अवसर पर विशेष रूप से उपस्थित हुए विभागाध्यक्ष मनोचिकित्सा विभाग डॉ. कमल प्रकाश, डॉ. महिंदर सिंह ,डॉ. संदीप और ऐडवोकेट अमित शर्मा ने मानसिक स्वास्थ्य संबंधी विभिन्न पहलुओं जैसे आत्महत्या संबंधित संभावनाओं, मानसिक रोगों के प्रति जन समुदायों में फैले रुड़ीवादी विचारधाराओं, नशा निवारण प्रबंधन और मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम 2017 के बारे में जानकारियां एवं
सुझाव प्रतिभागियों को दिए गए।
मानसिक रोगियों के मौलिक अधिकारों को सुनिश्चित बनाने और बेहतर ढंग से इस अधिनयम के कार्यन्वयन के लिए इस कार्यशाला में खंड चिकित्सा अधिकारियों, मेडिकल ऑफिसर और पुलिस विभाग के
विभिन्न अधिकारियों को विशेष रूप से शामिल किया गया ।
डॉ.आर के अग्निहोत्री ने जानकारी देते हुए बताया कि जनसमुदाय में मानसिक रोग तेजी से बढ़ रहे हैं और इस संबंध में पर्याप्त जानकारी एवं सेवाओं की कमी के चलते यह समस्या और भी गंभीर होती जा रही हैं। मानसिक रोगों के साथ जुड़े हुए कई काल्पनिक एवं रुड़ीवादी विचार इस समस्या को और भी पेचीदा बना रहे हैं। विकास की दौड़ में सामाजिक परिवर्तनों के चलते हमारी युवा पीढ़ी तेजी से मानसिक रोगों के चंगुल में फंसती जा रही हैं। उन्होंने बताया की इस समस्या का उचित समाधन होने के कारण 15 से 24 वर्ष के आयु वर्ग में अधिकतर आत्महत्या के मामले सामने आ रहे है और स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ो एवं सर्वेक्षणों में यह पाया गया है की एक हज़ार की जनसंख्या में 14 से 100 तक की संख्या में व्यक्ति भिन्न- भिन्न तरह के मानसिक रोगों से ग्रस्त पाए जाते हैं।
