संजीव महाजन, नूरपुर: बिमारी और मुसीबत कभी अमीरी-गरीबी देखकर नहीं आती । अगर यह किसी अमीर के घर आए तो वह अपना इंतजाम आसानी से कर लेता हैं पर अगर किसी गरीब को कोई बड़ी बिमारी लग जाए तो उस पर मुसीबतों का पहाड़ गिर पड़ता हैं और ऐसा ही कुछ हुआ हैं नूरपुर ब्लॉक की ग्राम पंचायत छतरोली के रहने वाले सुरजीत सिंह के परिवार के साथ। सुरजीत कुमार पेशे से मजदूर हैं। सुरजीत का 23 वर्षीय बेटा मनीष जिसके दोनों गुर्दे (किडनी) काम करना बंद कर चुके हैं। मनीष के पिता सुरजीत अपने बेटे का जीवन बचाने के लिए अपनी एक किडनी उसे दे रहे हैं।
2 साल तक सरकारी अस्पतालों में धक्के खाने के बाद, अपनी सारी जमा-पूंजी लगाकर, इन्होंने अपने बेटे का इलाज एक प्राइवेट अस्पताल में शुरू करवाया हैं। बेटे को किडनी तो वह खुद दे रहे हैं लेकिन किडनी ट्रांसप्लांट के लिए जो 7.5 लाख रुपए का खर्च आएगा उसे भरने के लिए पैसे उनके पास नहीं हैं और यही वजह भी है कि वह अपने बेटे का किडनी ट्रांसप्लांट नहीं करवा पा रहे हैं। हालांकि मुख्यमंत्री राहत कोष से 2.5 लाख की मदद का आश्वासन मिला हैं और 2 लाख की अतिरिक्त मदद रणजीत बख्शी जनकल्याण सभा की ओर से भी मनीष के इलाज़ के लिए दी जा रही हैं। इस राशि के बाद भी किडनी ट्रांसप्लांट में आने वाले खर्च की राशि पूरी नहीं जो पा रही हैं। यही वजह हैं कि रणजीत बख्शी जनकल्याण सभा ने मनीष के इलाज के लिए बाकी शेष राशि को लेकर लोगों से मदद करने अपील की हैं।
पीड़ित मनीष के पिता सुरजीत ने कहा कि मेरा बेटा मनीष पिछले काफी समय से बिमार हैं। मैं उसके इलाज के लिए जगह-जगह डाक्टरों के पास गया। शिमला आईजीएमसी अस्पताल में भी गया तो उन्होंने मुझे चंडीगढ़ पीजीआई में रैफर कर दिया पर किन्हीं कारणों से वहां भी इलाज नहीं हो सका तो फिर मैं किसी तरह चंडीगढ़ में मैक्स अस्पताल मनीष का इलाज करवाने चला गया। वहां पर मनीष की कडनी बदलने को कहा गया जिसका खर्चा 7.5 लाख रुपया बताया गया हैं। वह एक दिहाड़ीदार मजदूर हैं और बेटे का इलाज़ करवाने में अब असमर्थ हैं। 4.5 लाख रुपए की मदद तो उन्हें मुख्यमंत्री रलीफ़ फंड ओर रणजीत बख्शी जनकल्याण सभा की ओर से मिल गई हैं लेकिन बाकी बची राशि के लिए उन्हें दानी लोगों की दरकार हैं जो उनकी मदद कर सकें। उन्होंने लोगों से अपील कि हैं कि लोग उनके बेटे के इलाज में उनकी मदद करें ।
