पिता से मिली राजनीति में जाने की प्रेरणा,पहली बार बैजनाथ से उपचुनाव में मिली थी हार
कांगड़ा कांग्रेस का ब्राह्मण चेहरा हैं नेता सुधीर
भावना शर्मा, शिमला: प्रदेश में कांग्रेस पार्टी में जब कांग्रेस के दिग्गज नेताओं की बात होती है तो इसमें एक नाम धर्मशाला से नेता सुधीर शर्मा का भी शामिल है। सुधीर शर्मा के राजनीतिक सफर की बात की जाए तो इन्होंने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत छात्र राजनीति से ही की है। वैसे तो सुधीर शर्मा को राजनीति विरासत में भी मिली है क्योंकि इनके पिता पं. संत राम हिमाचल प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री थे और हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भी रहे थे। ऐसे में राजनीतिक परिवेश में पले- बढ़े सुधीर शर्मा के व्यक्तित्व में ही राजनीति बस चुकी थी जिसे बढ़ावा छात्र राजनीति ने दिया। यहीं से उनके राजनीतिक सफर की शुरुआत हुई और यह सफर आगे चलकर टाउन एंड कंट्री प्लानिंग मंत्री के पद तक पहुंचा। सुधीर शर्मा स्व. वीरभद्र सिंह के करीबी माने जाते थे। बता दें कि कांगड़ा के बीड़ बिलिंग में पैराग्लाइडिंग वर्ल्ड कप आयोजित करवाने का श्रेय सुधीर शर्मा को ही जाता है।
सुधीर शर्मा का जन्म 2 अगस्त 1972 को जिला कांगड़ा की बैजनाथ तहसील के चौबीन में हुआ था। यहीं से उन्होंने शिक्षा ग्रहण की। छात्र जीवन में ही उन्होंने छात्र राजनीति में अपना कदम रखा। सुधीर शर्मा 1991 में छात्र राजनीति में आए और कांगड़ा जिला के सचिव के तौर पर एनएसयूआई में काम आरंभ किया। 1994 में सुधीर युवा कांग्रेस के जिला महासचिव बनाए गए। उसके बाद 1996-2003 तक
राज्य युवा कांग्रेस के महासचिव की जिम्मेवारी उन्होंने निभाई। इसके साथ ही सुधीर को कांगड़ा युवा कला मंच के अध्यक्ष के तौर पर 1997 में चुना गया। 2002 में उन्हें राज्य कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) में सदस्य बनाया गया।
संगठन में कार्य करते हुए उन्हें 2001 में भारतीय युवा कांग्रेस सदस्यता अभियान के लिए जम्मू-कश्मीर के लिए ऑब्जर्वर बनाया। उसके बाद 2004 में गुजरात और पुणे के लिए दिशा कार्यक्रम के लिए ऑब्जर्वर एआईसीसी और मध्य प्रदेश, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान में राज्य विधानसभा चुनावों के लिए पर्यवेक्षक अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी बनाया गया। 2000 में पिता के निधन के बाद उन्हें उपचुनाव में कांग्रेस ने उतारा लेकिन वे हार गए जिसके बाद 2003 में प्रदेश विधानसभा के लिए बैजनाथ विधानसभा से चुने गए। सुधीर 18 अप्रैल 2005 से 18 अगस्त 2005 तक संसदीय सचिव, एमपीपी एंड पावर प्रदेश सरकार रहे। दिसंबर 2007 में फिर से राज्य विधानसभा के लिए बैजनाथ से निर्वाचित हुए।
संगठन में 2008 में उन्हें महासचिव प्रवक्ता पीसीसी की जिम्मेवारी भी दी गई। पुनर्सीमांकन के बाद बैजनाथ विधानसभा आरक्षित होने के बाद सुधीर शर्मा ने दिसंबर, 2012 में धर्मशाला विधानसभा से चुनाव लड़ा और विधायक चुने गए। 2018 में उन्हें
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी में सचिव बनाया गया। 2012 की कांग्रेस सरकार में सुधीर शर्मा शहरी विकास मंत्री भी रहे।
वर्ष 2000 से हुई थी असल रूप में राजनैतिक जीवन की शुरुवात
कांग्रेस नेता सुधीर शर्मा के असल राजनीतिक जीवन की शुरुआत वर्ष 2000 में हुई थी जब उन्होंने पहली बार बैजनाथ विधानसभा से अपने पिता की मृत्यु के बाद उनकी सीट पर उपचुनाव लड़ा, लेकिन इस चुनाव में वे हार गए। इसके बाद 2003 में आम चुनाव में उन्होंने इसी सीट से जीत दर्ज की। इसके बाद दोबारा 2007 में वह बैजनाथ से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे। बाद में डीलिमिटेशन के चलते उनकी सीट बदली और 2012 में वह धर्मशाला से चुनाव लड़े और जीते भी। इस दौरान उन्हें वीरभद्र सरकार में मंत्री बनाया गया,हालांकि 2017 के विधानसभा चुनाव में उन्हें भाजपा के किशन कपूर से हार का सामना करना पड़ा था। मौजूदा समय में सुधीर शर्मा ऑल इंडिया कांग्रेस (Congress) कमेटी के सचिव हैं।
सुधीर ने 2019 में धर्मशाला में हुए उप चुनाव से इस वजह से कर लिया था किनारा
सुधीर शर्मा पहली बार जब बैजनाथ विधानसभा सीट से अपने पिता पंडित संत राम के निधन के बाद उप चुनाव लड़ा था तो सुधीर शर्मा सहानुभूति की लहर के बावजूद भी जीत हासिल नहीं कर पाए थे। लिहाज़ा वह 2019 के उपचुनाव में उतरे ही नहीं ओर इस उपचुनाव से उन्होंने किनारा किया था क्योंकि उन्हें यह डर रहता है उपचुनाव उनके फेवर में नहीं रहता।
कांग्रेस का ब्राह्मण चेहरा माने जाते हैं सुधीर
कांगड़ा के बड़े नेताओं में सुधीर शर्मा शामिल है। सुधीर शर्मा कांगड़ा के ब्राह्मण चेहरा है। कांगड़ा की राजनीति की बात करें तो जीएस बाली, ब्रिज बिहारी बुटेल ओर सुधीर शर्मा ही यहां कांग्रेस के बड़े चेहरे माने जाते रहे है, लेकिन जीएस बाली का निधन हो गया है और ब्रिज बिहारी बुटेल भी राजनीति से पीछे हट गए है और उन्होंने भी अपने बेटे आशीष बुटेल को अपनी विरासत सौंपी है। ऐसे में अब सुधीर शर्मा ही कांगड़ा में ऐसे नेता है जिनका पूरे कांगड़ा में जनाधार है। वहीं जीएस बाली के निधन के बाद अब जिला कांगड़ा जोकि प्रदेश की राजनीति में सबसे अहम स्थान रखता है और सबसे अधिक विधानसभा सिटी भी इसी जिला में है तो ऐसे में जिला कांगड़ा में कांग्रेस की जीत का दारोमदार इस बार सुधीर शर्मा के कंधों पर ही रहने वाला है।
