मंजूर पठान,चंबा: चंबा जिला की राजकीय प्राथमिक पाठशाला अनोगा जहां पांचवीं कक्षा तक के बच्चों को शिक्षा दी जाती है। स्कूल में कक्षाएं तो पांच थी लेकिन शिक्षा ग्रहण करने वाले छात्रों की संख्या कुल सात। इन्हीं सात बच्चों के सहारे ये स्कूल चलता अगर इस स्कूल में शिक्षक युद्धवीर की तैनाती ना होती। यह वही शिक्षक है जिन्होंने सात बच्चों से चल रहे इस स्कूल में बच्चों का आंकड़ा 22 तक पहुंचाया है। इतना ही नहीं इस शिक्षक ने बच्चों को खेल खेल में पढ़ाने के ऐसे तरीके भी निकाले है जिससे पढ़ाई बोझ ना बनकर मनोरंजन के साथ ज्ञान का भी जरिया बन गई है। युद्धवीर के इन्हीं प्रयासों के चलते उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की ओर से शिक्षक दिवस के मौके पर राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
इस पुरस्कार को पा कर ना केवल युद्धवीर बल्कि उनका परिवार और स्कूल के छात्र भी बेहद खुश है। युद्धवीर टंडन ने बताया की वर्ष 2016 से मैंने अनोगा स्कूल में अपनी सेवाएं देनी शुरू की थी। उस समय स्कूल में बच्चों की संख्या महज 7 के करीब थी। उसके बाद हमने सबसे पहले बच्चों की संख्या को बढ़ाने के बारे मेें सोचा। हमने गांव गांव घर घर जा कर लोगों को सरकारी स्कूल में अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए प्रेरित किया। उसके बाद स्कूल में 3 गुना से अधिक बच्चों की संख्या में बढ़ोतरी हुई।
इसके बाद दूसरा काम था कि बच्चों की पढ़ाई को किस तरह से मनोरंजक बनाया जाए जिससे बच्चे पढ़ाई से घबराए नहीं बल्कि खेल-खेल में पढ़ाई कर सके। इसके लिए हमने बच्चों को खेल-खेल और एक्टिविटी के माध्यम से पढ़ाना शुरू किया गया। इसके बाद कोरोना महामारी आई जिसने बच्चों के स्कूलों को बंद करवा दिया और इस समय की सबसे बड़ी समस्या बच्चों को पढ़ाने को लेकर आई लेकिन युद्धवीर ने उसका भी समाधान निकाला और दो इबुक समग्र शिक्षा के नाम से तैयार की गई जिनको बाद में जिला के सभी स्कूलों में लागू किया गया है।
जेबीटी अध्यापक युद्धवीर टंडन ने बच्चों को अलग-अलग एक्टिविटीज के माध्यम से पढ़ाना शुरू किया ताकि बच्चों को जल्द समझ आ सके। वहीं बच्चों को डिजिटल शिक्षा के साथ में जोड़ा गया। शिक्षा में किए गए इन्हीं सब बदलावों और नवाचारों को लेकर
युद्धवीर टंडन और स्कूल को जिला स्तर पर भी कई पुरस्कार मिल चुके है। युद्धवीर टंडन ने कहा कि वैसे तो उन्हें जिला स्तर पर कई पुरस्कार मिले हैं लेकिन राष्ट्रीय पुरस्कार मिलना अपने आप में ही गर्व की बात है। इससे उन्हें जहां शिक्षा के क्षेत्र में और अधिक कार्य करने का प्रोत्साहन मिला है तो वही आगे बढ़ने की प्रेरणा भी मिली है। उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास है कि सरकारी स्कूलों में निजी स्कूलों के मुकाबले अधिक से अधिक बच्चे पढ़ सके और बेहतरीन तरीके से बच्चों को पढ़ाया जा सके।
वहीं स्कूल के बच्चों का कहना है की अध्यापक को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार मिला है जिस से उन्हें काफी खुशी हो रही है। बच्चों से जब शिक्षक युद्धवीर टंडन के पढ़ाने के तरीके के बारे में पूछा गया तो बच्चों ने कहा कि शिक्षक उन्हें एक्टिविटीज के माध्यम से और खेल के माध्यम से पढ़ाते हैं, जिससे उन्हें पढ़ाई आसान लगती है और जल्दी समझ आता है।
नन्हें उस्ताद पत्रिका भी की शुरू
शिक्षक युद्धवीर टंडन ने स्कूल में बच्चों के लिए नन्हें उस्ताद के नाम से स्कूल में पत्रिका भी शुरू है।इस पत्रिका इस बच्चों का साल भर का ब्यौरा और उनकी एक्टिविटीज को अंकित करवाया गया है ।
