शिमला | हिमाचल प्रदेश के राजकीय टीजीटी कला संघ ने कर्मचारियों की लंबित वित्तीय देनदारियों के शीघ्र भुगतान और शिक्षकों से जुड़ी नीतिगत मांगों को लेकर सरकार को 15 सूत्रीय मांगपत्र सौंपा है। संघ ने स्पष्ट किया है कि लंबे समय से लंबित मांगों की अनदेखी से शिक्षकों में असंतोष बढ़ रहा है।
संघ के प्रदेशाध्यक्ष सुरेश कौशल और महासचिव विजय हीर ने जारी बयान में कहा कि सरकार कर्मचारियों की आर्थिक समस्याओं को गंभीरता से ले और 1 जनवरी 2026 से सातवें वेतन आयोग के गठन व क्रियान्वयन को लेकर स्पष्ट नीति घोषित करे। उन्होंने कर्मचारी परिसंघ को मान्यता देने और कर्मचारियों व शिक्षकों की संयुक्त सलाहकार समिति (JCC) गठित करने की भी मांग उठाई।
लंबित एरियर और भत्तों के भुगतान की मांग
संघ ने 1 जनवरी 2016 से लंबित वेतन आयोग एरियर, 14 प्रतिशत महंगाई भत्ता व उसके एरियर का भुगतान शीघ्र करने की मांग की है। साथ ही पंजाब पैटर्न पर भत्तों के पुनरीक्षण, टीए-डीए में 30 किलोमीटर की शर्त से हो रहे नुकसान की समीक्षा और कर्मचारियों को देय भुगतान के लिए बेहतर विकल्प तलाशने की अपील की गई है।
वेतनमान, पदोन्नति और भर्ती पर जोर
टीजीटी कला संघ ने हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना और केरल की तर्ज पर बेहतर वेतनमान देने, 4-9-14 एसीपीएस स्कीम को राज्य स्तर पर बहाल करने और उत्तर प्रदेश मॉडल पर कैशलेस चिकित्सा सुविधा लागू करने की मांग की है।
इसके अलावा शिक्षा विभाग में टीजीटी से प्रवक्ता के 749 पदों, जेबीटी व सीएंडवी से टीजीटी के 400 पदों पर पदोन्नति, जेबीटी से एलटी प्रमोशन और प्राथमिक स्तर पर बीईईओ पदोन्नति प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने की मांग रखी गई है। संघ ने रिक्त जेबीटी और टीजीटी पदों पर कमीशन के माध्यम से 5154 पदों को जल्द भरने की प्रक्रिया तेज करने की भी अपील की।
वरिष्ठता सूची में देरी पर नाराजगी
संघ ने कहा कि वर्ष 2019 से 2025 के बीच नियुक्त और पदोन्नत टीजीटी शिक्षकों की वरिष्ठता सूची अब तक जारी नहीं की गई है, जिससे शिक्षकों में भारी नाराजगी है। संघ ने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन का रास्ता अपनाया जा सकता है।
