संजीव महाजन, नूरपुर: प्रदेश में भले ही सरकार की ओर से हर घर नल योजना के तहत गांव गांव तक लोगों के घरों तक पानी पहुंचाने के दावे किए जा रहे हो। या फिर करोड़ों रुपए पेयजल उठाओ योजनाओं पर खर्च करने की बात की जा रही हो लेकिन सच यह है कि बीते 40 सालों से जसूर के छतरौली गांव के लोग पानी की बूंद बूंद के लिए तरस रहे हैं। 40 वर्ष बीत जाने के बाद भी उनके गांव में पानी की समस्या हल नहीं हुई है बल्कि और ज्यादा विकराल होती जा रही है।
पानी जीवन के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता हैं, जिसके बिना जीवन संभव ही नहीं है। हर घर की छोटी मोटी जरूरते यूं कहें कि जीने के लिए पानी की अति आवश्यकता रहती है और जब उस गांव में पिछले 40 वर्ष से लोगों के घरों में पानी का नल नहीं पहुंचा हो तो यहां के बाशिंदों की स्थिति क्या होगी इसके बारे में आप खुद अंदाजा लगा सकते है। यही वजह है कि अब इस गांव के लोग पानी की समस्या से परेशान होकर सरकार से इसका समाधान करने की मांग कर रहे है।
घरों में पानी ना आने के चलते लोगों को मजबूर हैंडपंप से पानी लाना पड़ता है। वहीं पानी की निकासी ना होने के चलते गंदगी जहां- पड़ी रहती है । अब यहां के ग्रामीणों ने सरकार से यह मांग की है कि गांव की करीब 15 घरों को 1 हफ्ते के भीतर नल लगा कर इनकी पानी की समस्या को सदा के लिए दूर की जाए। नहीं तो ग्रामीण एक्ससीयन कार्यालय के सामने धरना प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे।
वहीं ग्रामीण शिल्पा ने बताया कि हमारी पंचायत छतरौली वार्ड नं 2 में पीने के पानी की बहुत ज्यादा दिक्कत है। हमारे पास राजेश पठानिया आए तो हमने इन्हें बताया और दिखाया तो इन्होंने आईपीएच एक्सियन से बात की और उन्हें समस्या के बारे में बताया गया है। आज विभाग की तरफ से एसडीओ व अधिकारी हमारे पास आए तो उन्होंने इस समास्या से निजात दिलवाने की बात कही है,पर हमें तब तक यकीन नहीं होगा जब तक इस समास्या का हल नहीं हो जाता है ।
वहीं ममता देवी ने कहा कि हमारे यहां पीने के पानी की बहुत दिक्कत है। यहां 25-30 सालों से पीने के पानी की दिक्कत चली आ रही हैं। गर्मियां में तो हमें टैंकर मंगवा कर पानी लेना पड़ता है। वही पानी हम इस्तेमाल करते हैं और शिकायत करने के बावजूद भी इस ओर प्रशासन व विभाग कोई ध्यान नहीं दे रहा ।
वहीं ग्रामीणों की इस समस्या पर हिमाचल प्रदेश अध्यक्ष मानव अधिकार लोक बॉडी एवं संगठन मंत्री आम आदमी पार्टी राजेश पठानिया ने कहा कि कल हमें फोन आया था तो ग्रामीणों ने बताया कि हमारे यहां तीस- चालीस सालों से पानी नहीं आ रहा है। ग्रामीणों की इस बात को सुनकर जब उन्होंने खुद गांव में जाकर देखा तो गांव की महिलाओं ने उन्हें अपनी समस्या से अवगत करवाया।
समास्या बताने के बाद उन्होंने आईपीएच एक्सियन नूरपुर को फोन करके इस समस्या के बारे में बताया है। उसके बाद एसडीओ व ओर अधिकारी यहां गांव में आए है। उन्होंने गांव का निरीक्षण करने के बाद कहा है कि गांव में पानी का टैंक का बना हुआ है सिर्फ पाइप डाली जानी है और ऐसे में जब फसल कट जाएगी तो पानी की पाइप डालकर यहां लोगों को पानी की समस्या से निजात दिलवाई जाएगी।
राजेश पठानिया का कहना है कि भले ही विभाग की ओर से फ़सल कट जाने के बाद पानी की पाइपें बिछाकर ग्रामीणों को पानी मुहैया करवाया जाएगा, लेकिन तब तक ग्रामीणों की समस्या का समाधान करने के लिए गांव में जो हैंडपंप लगा हुआ है उसमें मोटर लगाकर लोगों को पानी मुहैया करवाया जा सकता है। ऐसे में उन्होंने उम्मीद जताई है कि विभाग इस विकल्प पर भी काम करेगा और लोगों को जल्द से जल्द पानी मुहैया करवाया जाएगा।
वहीं इस पूरे मामले पर आईपीएच एसडीओ अनुराग ने कहा कि हमें छतरौली गांव के लोगों की शिकायत मिली थी कि उन्हें काफी समय से पीने के पानी की दिक्कत आ रही है। लोग हैंड पंप से पानी ला रहे है। उन्होंने कहा कि गांव में पानी का एक टैंक तो बना हुआ है मगर खेतों में फसल होने की वजह से पाइप नहीं डाली गई है जैसे ही फसल कट जाएगी वैसे ही यहां पाइपें डालकर लोगों को उनके घरों में नल के माध्यम से पानी मुहैया करवाया जाएगा।
