शिमला (एकता): शिमला को पहाड़ों की रानी से ही जाना जाता है। यहां कई ऐसे पर्यटन स्थल हैं, जो सैलानियों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं। जब भी यहां सैलानी आते हैं तो इन जगहों पर होकर जरूर जाते हैं। इनमें से एक पर्यटन स्थल जाखू है। जिसके इतिहास के बारे में हम आपको बताएंगे। इसका इतिहास काफी रोचक और अद्भुत है। यहां सैलानियों का जमावड़ा लगा ही रहता है।

जानिए कहां स्थित है जाखू मंदिर
जाखू मंदिर शिमला का एक प्राचीन मंदिर है, जो हिंदू देवता भगवान हनुमान को समर्पित है। यह समुद्र तल से 2,455 मीटर की ऊंचाई पर रिज से 2.5 किमी पूर्व में शिमला की सबसे ऊंची चोटी जाखू हिल पर स्थित है। इसमें हनुमान जी की 108 फुट ऊंची मूर्ति है।

जाखू मंदिर का क्या है इतिहास
मान्यता है कि राम-रावण युद्ध के समय लक्ष्म जी के मूर्छित हो जाने पर संजीवनी बूटी लेने के लिए जा रहे हनुमान जी की नजर यहां तपस्या कर रहे यक्ष ऋषि पर पड़ी। फिर इसका नाम यक्ष ऋषि के नाम पर ही यक्ष से याक, याक से याकू, याकू से जाखू तक बदलता गया। कहा जाता है कि हनुमान जी जब विश्राम करने और संजीवनी बूटी लेने के लिए जाखू पर्वत के जिस स्थान पर उतरे, वहां आज भी उनके पैरों के निशान मौजूद हैं उन्हें संगमरमर से बनवा कर मंदिर में रखा गया है।

बताया जा रहा है कि कालनेमि नामक राक्षस के मायाजाल के कारण हनुमान जी देरी होने के कारण कहीं ओर से चले गए। अपने वचन के अनुसार यक्ष ऋषि से मुलाकात नहीं कर पाए। इस पर ऋषि परेशान हो गए। उनकी परेशानी दूर करने के लिए अंततः हनुमान जी ने यक्ष ऋषि को दर्शन दिया। इसके बाद इस स्थान पर हनुमान जी की खुद की प्रतिमा प्रकट हुई। इसे लेकर यक्ष ऋषि ने हनुमान जी का यह मंदिर बनवाया।

जानिए मंदिर का निर्माण कब हुआ?
जाखू मंदिर का निर्माण 2008 में शुरू किया गया था और साल 2010 में पूरा हुआ। मंदिर का उद्घाटन अभिषेक बच्चन, उनकी बहन श्वेता नंदा, उनके पति निखिल नंदा एक बिजनेस टाइकून और हिमाचल प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने किया। मंदिर में हनुमान जी की मूर्ति 108 फीट लंबी है।

